Category Archives: RAHIM

RAHIM

रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय। पसु खर खात सवादसों, गुर गुलियाए खाय॥241॥ रहिमन रिस को छाँड़ि कै, करौ गरीबी भेस। मीठो बोलो नै चलो, सबै तुम्‍हारो देस।1242॥…

RAHIM

रहिमन आँटा के लगे, बाजत है दिन राति। घिउ शक्‍कर जे खात हैं, तिनकी कहा बिसाति॥181॥ रहिमन उजली प्रकृत को, नहीं नीच को संग। करिया बासन कर गहे, कालिख लागत…

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नैन सलोने अधर मधु, कहि रहीम घटि कौन। मीठो भावै लोन पर, अरु मीठे पर लौन॥121॥ पन्‍नग बेलि पतिव्रता, रति सम सुनो सुजान। हिम रहीम बेली दही, सत जोजन दहियान॥122॥…

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जब लगि जीवन जगत में, सुख दुख मिलन अगोट। रहिमन फूटे गोट ज्‍यों, परत दुहुँन सिर चोट॥61॥ जब लगि बित्‍त न आपुने, तब लगि मित्र न कोय। रहिमन अंबुज अंबु…

RAHIM ( GANGA JAMUNA TAHJEEB )

तैं रहीम मन आपुनो, कीन्‍हों चारु चकोर। निसि बासर लागो रहै, कृष्‍णचंद्र की ओर॥1॥ अच्‍युत-चरण-तरंगिणी, शिव-सिर-मालति-माल। हरि न बनायो सुरसरी, कीजो इंदव-भाल॥2॥ अधम वचन काको फल्‍यो, बैठि ताड़ की छाँह।…