Category Archives: rahat indori

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था मैं बच भी जाता तो इक रोज़ मरने वाला था तेरे सलूक तेरी आगही की उम्र दराज़ मेरे अज़ीज़ मेरा ज़ख़्म भरने…

मेरा दोस्त मेरा हमनवा

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ मेरी नज़र में वो…

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में और तुझे तेरी निगाहों से बचा…

भटक मत जाना

किसी आहू के लिये दूर तलक मत जाना शाहज़ादे कहीं जंगल में भटक मत जाना इम्तहां लेंगे यहाँ सब्र का दुनिया वाले मेरी आँखों ! कहीं ऐसे में चलक मत…

कत्थई आंखों में

उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे रूठे हैं चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर…

आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे,

आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे, इस जज़ीरे को भी समन्दर दे| अपना चेहरा तलाश करना है, गर नहीं आइना तो पत्थर दे| बन्द कलियों को चाहिये शबनम, इन चिराग़ों…

रात क्या मांगे इक सितारा

रात क्या मांगे इक सितारा लहर क्या मांगे इक किनारा धरती मांगे छाव गगन की बाती मांगे ज्योत गैन की माँ अपने मुन्ने का सहारा लाल मेरे जब भी लेती…

इन्तेज़मात नये सिरे से सम्भाले जायें

इन्तेज़मात नये सिरे से सम्भाले जायें| जितने कमज़र्फ़ हैं महफ़िल से निकाले जायें| मेरा घर आग की लपटों में छुपा है लेकिन, जब मज़ा है तेरे आँगन में उजाले जायें|…

अँधेरे चारों तरफ़

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे लहूलोहान पड़ा था…