Category Archives: khvaja Meer dard

अर्ज़ ओ समाँ कहाँ तेरी वुसअत को पा सके

अर्ज़ ओ समाँ कहाँ तेरी वुसअत को पा सके मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समाँ सके वेहदत में तेरी हर्फ़ दुई का न आ सके आईना क्या…

जग में आकर इधर उधर देखा|

जग में आकर इधर उधर देखा| तू ही आया नज़र जिधर देखा| जान से हो गए बदन ख़ाली, जिस तरफ़ तूने आँख भर देखा| नाला, फ़रियाद, आह और ज़ारी, आप…

तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी

तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी| रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी…

तुझी को जो यां जल्वा फ़र्मा न देखा

तुझी को जो यां जल्वा फ़र्मा न देखा| बराबर है दुनिया को देखा न देखा| मेरा ग़ुन्चा-ए-दिल वोह दिल-गिरिफ़ता, कि जिस को कसो ने कभी वा न देखा| अजिअत, मुसीबत,…

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया 

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया पर मुँह फिर इस तरफ़ न किया उसने जो गया फिरती है मेरी ख़ाक सबा दर-ब-दर लिए, अय चश्म-ए-अश्कबार ये क्या तुझ…

हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तजू करें

हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तजू करें| दिल ही नहीं रहा है जो कुछ आरजू करें| मिट जायें एक आन में कसरत नमयाँ, हम आईने के सामने आ…

मेरा जी है जब तक तेरी जुस्तजू है

मेरा जी है जब तक तेरी जुस्तजू है ज़बाँ जब तलक है यही गुफ़्तगू है ख़ुदा जाने क्या होगा अंजाम इसका मै बेसब्र इतना हूँ वो तुन्द ख़ू है तमन्ना…

अपने तईं तो हर घड़ी ग़म है, अलम है, दाग़ है 

अपने तईं तो हर घड़ी ग़म है, अलम है, दाग़ है याद करे हमें कभी कब ये तुझे दिमाग़ है जी की ख़ुशी नहीं गिरो सब्ज़-ओ-गुल के हाथ कुछ दिल…

अगर यों ही ये दिल सताता रहेगा 

अगर यों ही ये दिल सताता रहेगा तो इक दिन मेरा जी ही जाता रहेगा मैं जाता हूँ दिल को तेरे पास छोड़े मेरी याद तुझको दिलाता रहेगा गली से…

चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम 

चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम बहार-ए-बाग़ तो यूँ ही रही लेकिन किधर शबनम अर्क़ की बूंद उस की ज़ुल्फ़ से रुख़सार पर टपकी ताज्जुब की…

रौंदे है नक़्शे-पा की तरह ख़ल्क याँ मुझे

रौंदे है नक़्शे-पा की तरह ख़ल्क याँ मुझे अय उम्र-रफ़्ता छोड़ गयी तू कहाँ मुझे अय गुल तू रख़्त बाँध उठाऊँ मैं आशियाँ गुलचीं तुझे न देख सके बाग़बाँ मुझे…

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया 

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया पर मुँह फिर इस तरफ़ न किया उसने जो गया फिरती है मेरी ख़ाक सबा दर-ब-दर लिए, अय चश्म-ए-अश्कबार ये क्या तुझ…