Category Archives: Kabir

काशी नरेश क्षमा माँगने आये कबीर से

एक बार की बात है, काशी नरेश राजा वीरदेव सिंह जुदेव अपना राज्य छोड़ने के दौरान माफी माँगने के लिये अपनी पत्नी के साथ कबीर मठ आये थे। कहानी ऐसे…

केहि समुझावौ सब जग

केहि समुझावौ सब जग अन्धा॥ ॥ इक दु होयँ उन्हैं समुझावौं सबहि भुलाने पेटके धन्धा। पानी घोड पवन असवरवा ढरकि परै जस ओसक बुन्दा॥ १॥ गहिरी नदी अगम बहै धरवा…

दिवाने मन भजन

दिवाने मन भजन बिना दुख पैहौ ॥ टेक॥ पहिला जनम भूत का पै हौ सात जनम पछिताहौ। काँटा पर का पानी पैहौ प्यासन ही मरि जैहौ॥ १॥ दूजा जनम सुवा…

झीनी झीनी बीनी चदरिया

झीनी झीनी बीनी चदरिया ॥ काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया ॥ १॥ इडा पिङ्गला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया ॥ २॥ आठ…

रे दिल गाफिल

रे दिल गाफिल गफलत मत कर एक दिना जम आवेगा॥ टेक॥ सौदा करने या जग आया पूजी लाया मूल गँवाया प्रेमनगर का अन्त न पाया ज्यों आया त्यों जावेगा॥ १॥…

करम गति टारै

करम गति टारै नाहिं टरी॥ टेक॥ मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी सिधि के लगन धरि। सीता हरन मरन दसरथ को बनमें बिपति परी॥ १॥ कहँ वह फन्द कहाँ वह पारधि…

काल की महिमा

कबीर टुक टुक चोंगता, पल पल गयी बिहाय | जिन जंजाले पड़ि रहा, दियरा यमामा आय || जो उगै सो आथवै, फूले सो कुम्हिलाय | जो चुने सो ढ़हि पड़ै,…

व्यवहार की महिमा

कबीर गर्ब न कीजिये, इस जीवन की आस | टेसू फूला दिवस दस, खंखर भया पलास || कबीर गर्ब न कीजिये, इस जीवन कि आस | इस दिन तेरा छत्र…

भक्ति की महिमा

भक्ति बीज पलटै नहीं, जो जुग जाय अनन्त | ऊँच नीच घर अवतरै, होय सन्त का सन्त || भक्ति पदारथ तब मिलै, तब गुरु होय सहाय | प्रेम प्रीति की…

सुख-दुःख की महिमा

सुख – दुःख सिर ऊपर सहै, कबहु न छाडै संग | रंग न लागै और का, व्यापै सतगुरु रंग || कबीर गुरु कै भावते, दुरहि ते दीसन्त | तन छीना…

सेवक की महिमा

सवेक – स्वामी एक मत, मत में मत मिली जाय | चतुराई रीझै नहीं, रीझै मन के भाय || सतगुरु शब्द उलंघ के, जो सेवक कहुँ जाय | जहाँ जाय…

संगति की महिमा

कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय | दुरमति दूर बहावासी, देशी सुमति बताय || कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय | खीर खांड़ भोजन मिलै, साकत…