Category Archives: Poet name K

ज्योति को दुख ने किया पावन

ज्योति को दुख ने किया पावन सूर्य कण-कण रक्त से सींचा समय का रथ रथी-सा खींचा प्लव बना पथ, पथ बना प्लावन एक उद्बोधन, खुले तारे एक आश्वासन, बिना हारे…

नींद की मछलियां खेलतीं धार पर

स्वप्न-शैवाल से कुछ निकलतीं उधर कुछ मचलतीं वहां, कुछ बिछलतीं इधर कुछ अतल को हिलोरें किरण-पुच्छ से कुछ दीये-सी जलें शुक्ति-शृंगार पर कुछ चपल-रश्मियों से उभरती चलें दूधियां चांदनी में…

मनुष्य

सूना-सूना हृदय कि जिसका गान खो गया है बुझा दीप या टूटा तारा, मरु उदास या सूखी धारा, वह तममय मंदिर, जिसका भगवान खो गया है अपना ही अवसान निराला,…

शब्द के अर्थ ने द्वार खोला नहीं

गीत लिखकर थका, गीत गाकर थका शब्द के अर्थ ने द्वार खोला नहीं छंद तारे बने, छंद नभ भी बना छंद बनती हवाएं रही रातभर छंद बनकर उमड़ती चली निर्झरी…

सागर-सा उमड़ पडूं मैं

सागर-सा उमड़ पडूं मैं लहरें असंख्य फेलाकर विचरूं झंझा के रथ पर मैं ध्वंसक रूप बनाकर। मैं शिव-सा तांडव दिखलाऊं मैं करूं प्रलय-सा-गर्जन बिजली बनकर तड़कूं मैं कांपे नभ अवनी…

मुरझाता हूं, मुस्काने से

मन के भीतर मौन बोलता स्वर की चिर ऊर्म्मिल-लहरों पर युग-युग का चैतन्य डोलता मन के भीतर मौन बोलता अग्नि-पिंड-सा मैं जल उठता नक्षत्रों का जग बन उठता निर्मल छाया…

छाँह छलकि के गिरल डाल से

छाँह छलकि के गिरल डाल से पात-पात तूफान बन्द बा बादल झुकल कि झील-छंद बा स्वर, सुर, अलंकार सब के सब सुलग उठी तू छुअ ज्वाल से छाँह छलकि के…

कैकेयी

मैं न सोचती बात स्वर्ग की अलका की अथवा अंबर की मैं न सोचती बात विहंसते तारों के आलोकित घर की मैं न सोचती बात अवध की या विशाल इस…

आश्वस्त

मैं तो सांसों का पंथी हूं साथ आयु के चलता मेरे साथ सभी चलते हैं बादल भी, तूफान भी कलियां देखीं बहुत, फूल भी लतिकाएं भी तरु भी उपवन भी,…

एक गीत हर दग्ध हृदय में

चिह्न रक्त के मिले जहां भी मारुत धोता रहा रात-भर मानव-मन के अंतरतम में समर छिड़ा जो, नया नहीं है हिंस्र वन्य पशु-सा आ बैठा अंधकार जो, गया नहीं है…

मेरे मन का भार

मेरे मन का भार प्यार से कैसे तोल सकोगे? आज मौन का पट प्यारे! तुम कैसे खोल सकोगे? हिय-हारक मृदुहीर-हार पर लुटते लाख-हजार! किस कीमत पर इन टुकड़ों को तुम…