Category Archives: Anwar Shaor

ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल

ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल कुछ न कुछ तो चाहिए बाबा दवा-ए-दर्द-ए-दिल रात को आराम से हूँ मैं न दिन को चैन से हाए है वहशत-ए-दिल हाए…

ये ख़ुद को देखते रहने की है जो ख़ू मुझ में

ये ख़ुद को देखते रहने की है जो ख़ू मुझ में छुपा हुआ है कहीं वो शगुफ़्ता-रू मुझ में माह ओ नुजूम को तेरी जबीं से निस्बत दूँ अब इस…

सुलैमान-ए-सुख़न तो ख़ैर किया हूँ

सुलैमान-ए-सुख़न तो ख़ैर किया हूँ यके अज़ शहर-ए-यारान-ए-सबा हूँ वो जब कहते हैं फ़र्दा है ख़ुश-आइंद अजब हसरत से मुड़ कर देखता हूँ फ़िराक़ ऐ माँ के मैं ज़ीना-बा-ज़ीना कली…

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात को अकेला मैं

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात को अकेला मैं कहाँ तक और किसी पर करूँ भरोसा मैं हुनर वो है के जियूँ चाँद बन कर आँखों में रहूँ दिलों में क़यामत की…

मैं ख़ाक हूँ आब हूँ हवा हूँ

मैं ख़ाक हूँ आब हूँ हवा हूँ और आग की तरह जल रहा हूँ तह-ख़ाना-ए-ज़ेहन में न जाने क्या शय है जिसे टटोलता हूँ दुनिया को नहीं है मेरी परवा…

मैं बज़्म-ए-तसव्वुर में उसे लाए हुए था

मैं बज़्म-ए-तसव्वुर में उसे लाए हुए था जो साथ न आने की क़सम खाए हुए था दिल जुर्म-ए-मोहब्बत से कभी रह न सका बाज़ हालांकि बहुत बार सज़ा पाए हुए…

जो सुनता हूँ कहूँगा मैं जो कहता हूँ सुनूँगा मैं

जो सुनता हूँ कहूँगा मैं जो कहता हूँ सुनूँगा मैं हमेशा मजलिस-ए-नुत्क़-ओ-समाअत में रहूँगा मैं नहीं है तल्ख़-गोई शेव-ए-संजीदगाँ लेकिन मुझे वो गालियाँ देंगे तो क्या चुप साध लूँगा मैं…

हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए

हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए आज कल हैं वो याद आए हुए मैं ने रातें बहुत गुज़ारी हैं सिर्फ़ दिल का दिया जलाए हुए एक उसी शख़्स का नहीं…