Category Archives: Anwar Sabri

वक़्त जब करवटें बदलता है

वक़्त जब करवटें बदलता है फ़ितना-ए-हश्र साथ चलता है मौज-ए-ग़म से ही दिल बहलता है ये चराग़ आँधियों में जलता है उस को तूफ़ाँ डुबो नहीं सकता जो किनारों से…

उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

उम्र गुज़री है इल्तिजा करते क़िस्सा-ए-ग़म लब-आशना करते जीने वाले तेरे बग़ैर ऐ दोस्त मर न जाते तो और क्या करते हाए वो क़हर-ए-सादगी-आमेज़ काश हम फिर उन्हें ख़फ़ा करते…

तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म

तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने जहाँ दिल की ख़लिश उभरी तुम्हें आवाज़ दी मैं ने तलब की राह में खा कर शिकस्त-ए-आगही मैं ने जुनूँ की…

तल्ख़ा ब-ग़म ख़नदा-जबीं हो के पिए जा

तल्ख़ा ब-ग़म ख़नदा-जबीं हो के पिए जा मौहूम उम्मीदों के सहारों पे जिए जा मायूस न हो बे-रुख़ी-ए-चश्म-ए-जहाँ से शाइस्ता-ए-एहसास कोई काम किये जा शिकवा न कर इस दौर-ए-जुनूँ-ज़ाद का…

रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम

रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम बंदा-नवाज़ जैसे ख़ुदा हो गए हो तुम मजबूरियों को देख के अहल-ए-नियाज़ की शायान-ए-ऐतबार-ए-जफ़ा हो गए हो तुम होता नहीं है कोई…

मुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है

मुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है जज़्बा-ए-दिल भी मेरे काम नहीं आता है है अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल के दम-ए-ज़िक्र-ए-वफ़ा याद उन को भी मेरा नाम नहीं आता है उफ़ वो मासूम…

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद कोई आया ही नहीं आबला-पा मेरे बाद मेरे दम तक ही रहा रब्त-ए-नसीम ओ रुख़-ए-गुल निकहत-आमेज़ नहीं मौज-ए-सबा मेरे बाद अब न…

हर साँस में ख़ुद अपने न होने का गुमाँ था

हर साँस में ख़ुद अपने न होने का गुमाँ था वो सामने आए तो मुझे होश कहाँ था करती हैं उलट-फेर यूँही उन की निगाहें काबा है वहीं आज सनम-ख़ाना…