Category Archives: ‘Amanat’ Lakhnavi

ज़मज़मा किस की ज़बाँ पर ब-दिल-ए-शाद आया

ज़मज़मा किस की ज़बाँ पर ब-दिल-ए-शाद आया मुँह न खोला था के पर बाँधने सय्याद आया क़द जो बूटा सा तेरा सर्व-ए-रवाँ याद आया ग़श पे ग़श मुझ को चमन…

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज नाज़िल हुई बला मेरे सर पर कहाँ से आज तड़पूँगा हिज्र-ए-यार में है रात चौधवीं तन चाँदनी में होगा मुक़ाबिल कताँ से आज दो-चार रश्क-ए-माह…

सुब्ह-ए-विसाल-ए-ज़ीस्त का नक़्शा बदल गया

सुब्ह-ए-विसाल-ए-ज़ीस्त का नक़्शा बदल गया मुर्ग़-ए-सहर के बोलते ही दम निकल गया दामन पे लोटने लगे गिर गिर के तिफ़्ल-ए-अश्क रोए फ़िराक़ में तो दिल अपना बहल गया दुश्मन भी…

रूह को राह-ए-अदम में मेरा तन याद आया

रूह को राह-ए-अदम में मेरा तन याद आया दश्त-ए-ग़ुर्बत में मुसाफ़िर को वतन याद आया चुटकियाँ दिल में मेरे लेने लगा नाख़ुन-ए-इश्क़ गुल-बदन देख के उस गुल का बदन याद…

रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह

रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह गिरह में रखते हैं हम आबरू गुहर की तरह सुनी सिफ़त किसी ख़ुश-चश्म की जो मरदुम से ख़याल दौड़ गया आँख पर…

लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं

लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं मय नहीं यार नहीं शीशा नहीं जाम नहीं कब मुझे याद रुख़ ओ ज़ुल्फ़-ए-सियह-फ़ाम नहीं कोई शुग़ल इस के सिवा सुब्ह से ता…

ख़ाना-ए-ज़ंजीर का पाबंद रहता हूँ सदा

ख़ाना-ए-ज़ंजीर का पाबंद रहता हूँ सदा घर अबस हो पूछते मुझ ख़ानमाँ-बर्बाद का इश्क़-ए-क़द-ए-यार में क्या ना-तवानी का है ज़ोर ग़श मुझे आया जो साया पड़ गया शमशाद का ख़ुद-फ़रामोशी…

गिर पड़े दाँत हुए मू-ए-सर ऐ यार सफ़ेद

गिर पड़े दाँत हुए मू-ए-सर ऐ यार सफ़ेद क्यूँ न हो ख़ौफ़-ए-अजल से ये सियह-कार सफ़ेद दो क़दम फ़र्त-ए-नज़ाकत से नहीं चल सकता रंग हो जाता है उस का दम-ए-रफ़्तार…

दिखलाए ख़ुदा उस सितम-ईजाद की सूरत

दिखलाए ख़ुदा उस सितम-ईजाद की सूरत इस्तादा हैं हम बाग़ में शमशाद की सूरत याद आती है बुलबुल पे जो बे-दाद की सूरत रो देता हूँ मैं देख के सय्याद…

भूला हूँ मैं आलम को सर-शार इसे कहते हैं

भूला हूँ मैं आलम को सर-शार इसे कहते हैं मस्ती में नहीं ग़ाफ़िल हुश्यार इसे कहते हैं गेसू इसे कहते हैं रुख़सार इसे कहते हैं सुम्बुल इसे कहते हैं गुल-ज़ार…

बानी-ए-जोर-ओ-जफ़ा हैं सितम-ईजाद हैं सब

बानी-ए-जोर-ओ-जफ़ा हैं सितम-ईजाद हैं सब राहत-ए-जाँ कोई दिल-बर नहीं जल्लाद हैं सब कभी तूबा तेरे क़ामत से न होगा बाला बातें कहने की ये ऐ ग़ैरत-ए-शमशाद हैं सब मिज़ा ओ…

आग़ोश में जो जलवा-गर इक नाज़नीं हुआ

आग़ोश में जो जलवा-गर इक नाज़नीं हुआ अंगुश्तरी बना मेरा तन वो नगीं हुआ रौनक़-फ़ज़ा लहद पे जो वो मह-जबीं हुआ गुम्बद हमारी क़ब्र का चर्ख़-ए-बरीं हुआ कंदा जहाँ में…