Category Archives: Akbar Allahbaadi

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल-ए-हस्ती नहीं है दिल लगाने के लिए क्या मुझे ख़ुश आए ये हैरत-सरा-ए-बे-सबात होश उड़ने के लिए है जान जाने…

ग़म्ज़ा नहीं होता के इशारा नहीं होता

ग़म्ज़ा नहीं होता के इशारा नहीं होता आँख उन से जो मिलती है तो क्या क्या नहीं होता जलवा न हो मानी का तो सूरत का असर क्या बुलबुल गुल-ए-तस्वीर…

जहाँ में हाल मेरा इस क़दर ज़बून हुआ कि मुझ को देख के

जहाँ में हाल मेरा इस क़दर ज़बून हुआ कि मुझ को देख के बिस्मिल को भी सुकून हुआ ग़रीब दिल ने बहुत आरज़ूएँ पैदा कीं मगर नसीब का लिक्खा कि…

सदियों फ़िलासफ़ी की चुनाँ और चुनीं रही

सदियों फ़िलासफ़ी की चुनाँ और चुनीं रही लेकिन ख़ुदा की बात जहाँ थी वहीं रही ज़ोर-आज़माइयाँ हुईं साइंस की भी ख़ूब ताक़त बढ़ी किसी की किसी में नहीं रही दुनिया…

जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श का शैदा होगा

जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श का शैदा होगा उठ भी जाएगा जहाँ से तो मसीहा होगा वो तो मूसा हुआ जो तालिब-ए-दीदार हुआ फिर वो क्या होगा कि जिस ने तुम्हें देखा…

मायूस कर रहा है नई रोशनी का रंग

मायूस कर रहा है नई रोशनी का रंग इसका न कुछ अदब है न एतबार है तक़दीस मास्टर की न लीडर का फ़ातेहा यानी न नूरे-दिल है, न शमये मज़ार…

जो हस्रते दिल है, वह निकलने की नहीं

जो हस्रते दिल है, वह निकलने की नहीं जो बात है काम की, वह चलने की नहीं यह भी है बहुत कि दिल सँभाले रहिए क़ौमी हालत यहाँ सँभलने की…

ख़ैर उनको कुछ न आए फाँस लेने के सिवा

ख़ैर उनको कुछ न आए फाँस लेने के सिवा मुझको अब करना ही क्या है साँस लेने के सिवा थी शबे-तारीक, चोर आए, जो कुछ था ले गए कर ही…

उससे तो इस सदी में नहीं हम को कुछ ग़रज़

उससे तो इस सदी में नहीं हम को कुछ ग़रज़ सुक़रात बोले क्या और अरस्तू ने क्या कहा बहरे ख़ुदा ज़नाब यह दें हम को इत्तेला साहब का क्या जवाब…