Category Archives: Abdul Gaffur Shahbaaz

कहाँ नसीब ज़मुर्रद को सुर्ख़-रूई ये

कहाँ नसीब ज़मुर्रद को सुर्ख़-रूई ये समझ में लाल की अब तक हिना नहीं आई ख़जिल है आँखों से नर्गिस गुलाब गालों से वो कौन फूल है जिस को हया…

है इश्क़ तो फिर असर भी होगा

है इश्क़ तो फिर असर भी होगा जितना है इधर उधर भी होगा माना ये के दिल है उस का पत्थर पत्थर में निहाँ शरर भी होगा हँसने दे उसे…

बूँद अश्कों से अगर लुत्फ़-ए-रवानी माँगे

बूँद अश्कों से अगर लुत्फ़-ए-रवानी माँगे बुलबुला आँखों से ख़ूना-बा-फ़िशानी माँगे बहर-ए-उल्फ़त में चला है तो पहले मस्तूल तीर से आह के कश्ती-ए-दुख़ानी माँगे नुक्ता-ए-वस्ल दम-ए-अर्ज़ क़लम पर रक्खे बोसा…