Category Archives: Aasi Gajipuri

वहाँ पहुँच के ये कहना सबा सलाम के बाद

वहाँ पहुँच के ये कहना सबा सलाम के बाद के तेरे नाम की रट है ख़ुदा के नाम के बाद वहाँ भी वादा-ए-दीदार इस तरह टाला के ख़ास लोग तलब…

सारे आलम में तेरी ख़ुशबू है

सारे आलम में तेरी ख़ुशबू है ऐ मेरे रश्क-ए-गुल कहाँ तू है बरछी थी वो निगाह देखो तो लहू आँखों में है कि आँसू है एक दम में हज़ार दफ़्तर…

क़तरा वही के रू-कश-ए-दरिया कहें जिसे

क़तरा वही के रू-कश-ए-दरिया कहें जिसे यानी वो मैं ही क्यूँ न हूँ तुझ सा कहें जिसे वो इक निगाह ऐ दिल-ए-मुश्ताक़ उस तरफ़ आशोब-गाह-ए-हश्र-ए-तमन्ना कहें जिसे बीमार-ए-ग़म की चारा-गरी…

कुछ कहूँ कहना जो मेरा कीजिए

कुछ कहूँ कहना जो मेरा कीजिए चाहने वाले को चाहा कीजिए हौसला तेग़-ए-जफ़ा का रह न जाए आईए ख़ून-ए-तमन्ना कीजिए फ़ितना-ए-रोज़-ए-क़यामत है वो चाल आज वो आते हैं देखा कीजिए…

कलेजा मुँह को आता है शब-ए-फ़ुर्क़त जब आती है

कलेजा मुँह को आता है शब-ए-फ़ुर्क़त जब आती है अकेले मुँह लपेटे रोते रोते जान जाती है लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूँ तो मिस्सी मुँह बनाती है कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ…

कोई तो पीके निकलेगा, उडे़गी कुछ तो बू मुँह से।

कोई तो पीके निकलेगा, उडे़गी कुछ तो बू मुँह से। दरे-पीरेमुग़ाँ पर मैपरस्ती चलके बिस्तर हो॥ किसी के दरपै ‘आसी’ रात रो-रोके यह कहता था– कि “आखि़र मैं तुम्हारा बन्दा…

इश्क़ ने फ़रहाद के परदे में पाया इन्तक़ाम।

इश्क़ ने फ़रहाद के परदे में पाया इन्तक़ाम। एक मुद्दत से हमारा ख़ून दामनगीर था॥ वोह मुसव्वर था कोई या आपका हुस्नेशबाब। जिसने सूरत देख ली, इक पैकरे-तसवीर था॥ ऐ…

जो रही और कोई दम यही हालत दिल की।

जो रही और कोई दम यही हालत दिल की। आज है पहलु-ए-ग़मनाक से रुख़स्त दिल की॥ घर छुटा, शहर छुटा, कूचये-दिलदार छुटा। कोहो-सहरा में लिये फ़िरती है वहशत दिल की॥…

दागे़दिल दिलबर नहीं, सिने से फिर लिपटा हूँ क्यों?

दागे़दिल दिलबर नहीं, सिने से फिर लिपटा हूँ क्यों? मैं दिलेदुश्मन नहीं, फिर यूँ जला जाता हूँ क्यों? रात इतना कहके फिर आशिक़ तेरा ग़श कर गया। “जब वही आते…

वे तेरे, जीने की किस जी से तमन्ना करते?

वे तेरे, जीने की किस जी से तमन्ना करते? मर न जाते जो शबे-हिज्र तो हम क्या करते? तूने दावाए-ख़ुदाई न किया खूब किया। ऐ सनम! हम तेरे दीदार को…

नहीं होता कि बढ़कर हाथ रख दें।

नहीं होता कि बढ़कर हाथ रख दें। तड़पता देखते हैं, दिल हमारा॥ अगर क़ाबू न था दिल पर, बुरा था। वहाँ जाना सरे-महफ़िल हमारा॥ यह हालत है तो शायद रहम…

न कभी के बादापरस्त हम, न हमें यह कैफ़े-शराब है।

न कभी के बादापरस्त हम, न हमें यह कैफ़े-शराब है। लबेयार चूमें हैं ख़्वाब में, वही जोशे-मस्तिये-ख़्वाब है॥ दिल मुब्तिला है तिरा ही घर, उसे रहने दे कि ख़राब कर।…