Category Archives: Suryakant Tripathi Nirala

तपी आतप से जो सित गात

तपी आतप से जो सित गात, गगन गरजे घन, विद्युत पात। पलटकर अपना पहला ओर, बही पूर्वा छू छू कर छोर; हुए शीकर से निश्शर कोर, स्निग्ध शशि जैसे मुख…

चलीं निशि में तुम आई प्रात

चलीं निशि में तुम आई प्रात; नवल वीक्षण, नवकर सम्पात, नूपुर के निक्वण कूजे खग, हिले हीरकाभरण, पुष्प मग, साँस समीरण, पुलकाकुल जग, हिले पग जलजात।

तपन से घन, मन शयन से

तपन से घन, मन शयन से, प्रातजीवन निशि-नयन से। प्रमद आलस से मिला है, किरण से जलरुह किला है, रूप शंका से सुघरतर अदर्शित होकर खिला है, गन्ध जैसे पवन…

माँ अपने आलोक निखारो

माँ अपने आलोक निखारो, नर को नरक-त्रास से वारो। विपुल दिशावधि शून्य वगर्जन, व्याधि-शयन जर्जर मानव मन, ज्ञान-गगन से निर्जर जीवन करुणाकरों उतारो, तारो। पल्लव में रस, सुरभि सुमन में,…

किरणों की परियाँ मुसका दों

किरणों की परियाँ मुसका दों। ज्योति हरी छाया पर छा दी। परिचय के उर गूंजे नूपुर, थिर चितवन से चिर मिलनातुर, विष की शत वाणी से विच्छुर, गांस गांस की…

तुम्हारी छांह है, छल है

तुम्हारी छांह है, छल है, तुम्हारे बाल हैं, बल है। दृगों में ज्योति है, शय है, हृदय में स्पन्द है, भय है। गले में गीत है, लय है, तुम्हारी डाल…

घन आये घनश्याम न आये

घन आये घनश्याम न आये। जल बरसे आँसू दृग छाये। पड़े हिंडोले, धड़का आया, बढ़ी पैंग, घबराई काया, चले गले, गहराई छाया, पायल बजे, होश मुरझाये। भूले छिन, मेरे न…

बीन वारण के वरण घन

बीन वारण के वरण घन, जो बजी वर्षित तुम्हारी, तार तनु की नाचती उतरी, परी, अप्सरकुमारी। लूटती रेणुओं की निधि, देखती निज देश वारिधि, बह चली सलिला अनवसित ऊर्मिला, जैसे…

गगन गगन है गान तुम्हारा

गगन गगन है गान तुम्हारा, घन घन जीवनयान तुम्हारा। नयन नयन खोले हैं यौवन, यौवन यौवन बांधे सुनयन, तन तन मन साधे मन मन तन, मानव मानव मान तुम्हारा। क्षिति…

मुक्तादल जल बरसो

मुक्तादल जल बरसो, बादल, सरिसर कलकलसरसो बादल! शिखि के विशिख चपल नर्तन वन, भरे कुंजद्रुम षटपद गुंजन, कोकिल काकलि जित कल कूजन, सावन पावन परसो, बादल! अनियारे दृग के तारे…

हे जननि, तुम तपश्चरिता

हे जननि, तुम तपश्चरिता, जगत की गति, सुमति भरिता। कामना के हाथ थक कर रह गये मुख विमुख बक कर, निःस्व के उर विश्व के सुर बह चली हो तमस्तरिता।…

काम के छवि-धाम

काम के छवि-धाम, शमन प्रशमन राम! सिन्धुरा के सीस सिन्दूर, जगदीश, मानव सहित-कीश, सीता-सती-नाम। अरि-दल-दलन-कारि, शंकर, समनुसारि पद-युगल-तट-वारि सरिता, सकल याम। शेष के तल्प कल शयन अवशेष-पल, चयन-कलि-गन्ध-दल विश्व के…