Category Archives: ‘Siraj’ Aurangabadi

कोई हमारे दर्द का मरहम नहीं आशना नहीं दोस्त नहीं हम-दम नहीं

कोई हमारे दर्द का मरहम नहीं आशना नहीं दोस्त नहीं हम-दम नहीं आलम-ए-दीवानगी क्या ख़ूब है बे-कसी का वहाँ किसी कूँ ग़म नहीं ख़ौफ़ नहीं तीर-ए-तग़ाफूल सीं तिरे दिल हमारा…

ख़ुदा जाने सबा ने क्या कहीं ग़ुंचों के कानों में कि तब सीं देखता हूँ

ख़ुदा जाने सबा ने क्या कहीं ग़ुंचों के कानों में कि तब सीं देखता हूँ अंदलीबों कूँ फ़ुगानों में किया हूँ सैर हुस्न ओ दिल की यक-रंगी का गुलशन में…

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्‍क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्‍क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही न तो तू रहा न तो मैं रहा जो रही सो बे-ख़बरी रही शह-ए-बे-ख़ुदी ने अता किया मुझे अब लिबास-ए-बरहनगी न ख़िरद…

ख़ाक हूँ ऐतबार की सौगंद मुज़्तरिब हूँ क़रार की सौगंद

ख़ाक हूँ ऐतबार की सौगंद मुज़्तरिब हूँ क़रार की सौगंद मिस्ल-ए-आईना पाक-बाज़ी में साफ़ दिल हूँ ग़ुबार की सौगंद हौज़-ए-कौसर सीं प्यास बुझती नहीं उस लब-ए-आब-दार की सौगंद मोतबर नहीं…

कौन कहता है जफ़ा करते हो तुम शर्त-ए-माशूक़ी वफ़ा करते हो तुम

कौन कहता है जफ़ा करते हो तुम शर्त-ए-माशूक़ी वफ़ा करते हो तुम मुस्कुरा कर मोड़ लेते हो भवें ख़ूब अदा का हक़ अदा करते हो तुम हम शहीदों पर सितम…

काफ़िर हुआ हूँ रिश्‍ता-ए-जुन्नार की क़सम तुझ जुल्फ़-ए-हलक़ा-दार के हर तार की क़सम

काफ़िर हुआ हूँ रिश्‍ता-ए-जुन्नार की क़सम तुझ जुल्फ़-ए-हलक़ा-दार के हर तार की क़सम हरगिज़ मरीज़-ए-हिज्र कूँ बिन वस्ल नहीं इलाज उस ख़ुश-अदा की नर्गिस-ए-बीमार की क़सम उस गुल-बदन के काकुल-ए-पुर-पेच…

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया नूर-ए-ख़ुर्शीद फ़र्श-ए-राह किया

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया नूर-ए-ख़ुर्शीद फ़र्श-ए-राह किया हक़ ने अपने करम सती मुज कूँ मुल्क-ए-ख़ूबी का पादशाह किया मश्‍क-ए-ग़फ़लत से तीरा-बातिन ने सफ़्हा-ए-ज़िंदगी सियाह किया हौज़-ए-कौसर का…

जाना पे जी निसार हुआ क्या बजा हुआ उस राह में

जाना पे जी निसार हुआ क्या बजा हुआ उस राह में ग़ुबार हुआ क्या बजा हुआ मुद्दत से राज़-ए-इश्‍क़ मिरे पे अयाँ न था ये भेद आशकार हुआ क्या बजा…

इश्‍क़ की जो लगन नहीं देखा वो बिरह की अगन नहीं देखा

इश्‍क़ की जो लगन नहीं देखा वो बिरह की अगन नहीं देखा क़द्र मुज अश्‍क की वो क्या जाने जिस ने दुर्द-ए-अदन नहीं देखा तुज गली में जो कुई किया…

हुआ है मेहरबाँ वो मू-कमर आहिस्ता आहिस्ता

हुआ है मेहरबाँ वो मू-कमर आहिस्ता आहिस्ता क्या मुझ आह ने शायद असर आहिस्ता आहिस्ता किया है मुस्कुरा कर बात मिस्ल-ए-फूल गुल-रू ने निहाल-ए-इश्‍क़ ने लाया समर आहिस्ता आहिस्ता पिला…