Category Archives: Sail Dehlavi

आये हो वक़्ते-दफ़्न तो शाना हिला के जाओ

आये हो वक़्ते-दफ़्न तो शाना हिला के जाओ। आँख उसकी लग गई है, जिसे इन्तेज़ार था॥ मैयत तो उठ गई वो न आये नहीं सही। ‘साक़िब’ किसी के दिल पै,…

ज़ोम न कीजो शम्अ-रू बज़्म के सोज़-ओ-सज़ा पर

ज़ोम न कीजो शम्अ-रू बज़्म के सोज़-ओ-सज़ा पर रखियो नज़र बाज-ए-नाज़-ख़ातिर-ए-पीर-ए-नाज़ पर ज़ेब नहीं है शैख़ ये मय-कश-ए-पाक-बाज़ पर तोहमतें सौ लगाएगा दाग़-ए-ज़बीं नियाज़ पर कहता हूँ हर हसीं से…

वफ़ा का बंदा हूँ उल्फ़त का पासदार हूँ मैं

वफ़ा का बंदा हूँ उल्फ़त का पासदार हूँ मैं हरीफ़-ए-क़ुमरी-ओ-परवाना-ए-हज़ार हूँ मैं जुदा जुदा नज़र आती है जल्वा-गाह की तासीर क़रार हो गया मूसा को बे-क़रार हूँ मैं ख़ुमार जिस…

उड़ा सकता नहीं कोई मिरे अंदाज़-ए-शेवन को

उड़ा सकता नहीं कोई मिरे अंदाज़-ए-शेवन को ब-मुश्किल कुछ सिखाया है नवा-संजान-ए-गुलशन को गरेबाँ चाक करने का सबब वहशी ने फ़रमाया कि उस के तार ले कर मैं सियूंगा चाक-ए-दामन…

सुना भी कभी माजरा दर्द-ओ-ग़म का किसी दिलजले की ज़बानी कहो तो

सुना भी कभी माजरा दर्द-ओ-ग़म का किसी दिलजले की ज़बानी कहो तो निकल आएँ आँसू कलेेजा पकड़ लो करूँ अर्ज़ अपनी कहानी कहो तो तुम्हें रंग-ए-मय मर्ग़ूब क्या है गुलाबी…

मोहब्बत में जीना नई बात है

मोहब्बत में जीना नई बात है न मरना भी मर कर करामात है मैं रूस्वा-ए-उल्फ़त वो मारूफ़.-ए-हुस्न बहम शोहरतों में मसावात है न शाहिद न मय है न बज़्म-ए-तरब ये…

मिरे ग़ैरों से मुझ को रंज-ओ-ग़म यूँ भी है और यूँ भी

मिरे ग़ैरों से मुझ को रंज-ओ-ग़म यूँ भी है और यूँ भी वफ़ा-दुश्मन जफ़ा-जू का सितम यूँ भी है और यूँ भी कहीं वामिक़ कहीं मजनूँ रक़म यूँ भी है…

ख़िज़ाँ का जो गुलशन से पड़ जाए पाला

ख़िज़ाँ का जो गुलशन से पड़ जाए पाला तो सेहन-ए-चमन में न गुल हो न लाला लिया तेरे आशिक़ ने बरसों सँभाला बहुत कर गया मरने वाला कसाला पय-ए-फ़ातेहा हाथ…

हज़ारों इश्क़-ए-जुनूँ-ख़ेज़ के बने क़िस्से

हज़ारों इश्क़-ए-जुनूँ-ख़ेज़ के बने क़िस्से वरक़ हुए जो परेशाँ मिरे फ़साने के हैं ए‘तिबार से कितने गिरे हुए देखा इसी ज़माने में क़िस्से इसी ज़माने के क़रार-ए-जल्वा-नुमाई हुआ है फर्दा…

होते ही जवाँ हो गए पाबंद-ए-हिजाब और

होते ही जवाँ हो गए पाबंद-ए-हिजाब और घूँघट का इज़ाफ़ा हुआ बाला-ए-नक़ाब और जब मैं ने कहा कम करो आईन-ए-हिजाब और फ़रमाया बढ़ा दूँगा अभी एक नक़ाब और पीने की…

हक़ ओ नाहक़ जलाना हो किसी को तो जला देना

हक़ ओ नाहक़ जलाना हो किसी को तो जला देना कोई रोए तुम्हारे सामने तुम मुस्कुरा देना तरद्दुद बर्क़-रेज़ों में तुम्हें करने की क्या हाजत तुम्हें काफ़ी है हँसता देख…

हमें कहती है दुनिया ज़ख़्म-ए-दिल ज़ख्म-ए-जिगर वाले

हमें कहती है दुनिया ज़ख़्म-ए-दिल ज़ख्म-ए-जिगर वाले ज़रा तुम भी तो देखो हम को तुम भी हो नज़र वाले नज़र आएँगे नक़्श-ए-पा जहाँ उस फ़ित्नागर वाले चलेंगे सर के बल…