Category Archives: Safi Lakhnavi

कैसी-कैसी सूरतें ख़्वाबे-परीशाँ हो गईं

कैसी-कैसी सूरतें ख़्वाबे-परीशाँ हो गईं? सामने आँखों के आईं और पिन्हाँ हो गईं॥ ज़ोर ही क्या था जफ़ाये-बाग़बां देखा किये। आशियां उजडा़ किया, हम नातवां देखा किये॥ तू भी मायूसे-तमन्ना…

नज़र हुस्न-आश्ना ठहरी वो ख़िलवत हो कि जलवत हो

नज़र हुस्न-आश्ना ठहरी वो ख़िलवत हो कि जलवत हो। जब आँखें बन्द कीं तसवीरे-जानाँ देख लेते हैं। वो खुद सर से क़दम तक डूब जाते हैं पसीने में। मेरी महफ़िल…

बेक़रारी दिले-बीमार की अल्ला-अल्ला।

बेक़रारी दिले-बीमार की अल्ला-अल्ला। फ़र्शेगुल पर भी न आना था, न आराम आया॥ जौरे-दरबाँ की तो कुछ भी न हुई तहक़ीक़ात। मेरे ही सर मेरी फ़रियाद का इलज़ाम आया॥

ख़ामोश रहने दो ग़मज़दों को,

ख़ामोश रहने दो ग़मज़दों को, कुरेद कर हाले-दिल न पूछो। तुम्हारी ही सब इनायतें हैं, मगर तुम्हें कुछ खबर नहीं है। उन्हीं की चौखट सही, यह माना, रवा नहीं बेबुलाए…

कुछ भी न हैफ़ कर सके हस्ती-ए-मुस्तआ़र में

कुछ भी न हैफ़ कर सके हस्ती-ए-मुस्तआ़र में। हो गई खत्म ज़िन्दगी मौत के इन्तज़ार में॥ खुलते ही आँख इश्क़ ने हुस्ने-अदा पै जान दी। आई क़ज़ा शबाब में, देखी…

क्योंकर यहाँ तुम्हारी तबीयत बहल गई

क्योंकर यहाँ तुम्हारी तबीयत बहल गई। इतनी ही ज़िंदगी हमें ऐ खिज़्र! खल गई॥ जब एक रोज़ जान का जाना ज़रूर है। फिर फ़र्क क्या वह आज गई, ख्वाह कल…

इन्सान को उसने ख़ाक से पाक क्या।

इन्सान को उसने ख़ाक से पाक क्या। जी-हौसलये-ओ-साहबे-इदरीक किया॥ पहले तो बनाया उसे गंजीनये-इल्म। फिर गंज को पोशीदा-तहे-ख़ाक किया॥

न ख़ामोश रहना मेरे हम-सफ़ीरो!

न ख़ामोश रहना मेरे हम-सफ़ीरो! जब आवाज़ दूँ तुम भी आवाज़ देना॥ ग़ज़ल उसने छेडी़ मुझे साज़ देना। ज़रा उम्रे-रफ़्ता की आवाज़ देना॥

वो खुद सर से क़दम तक डूब जाते हैं पसीने में

वो खुद सर से क़दम तक डूब जाते हैं पसीने में। मेरी महफ़िल में जो उनको, पशेमां देख लेते हैं॥ ‘सफ़ी’ रहते हैं जानो-दिल फ़िदा करने पै आमादा। मगर उस…

तालिबे-दीद पर आँच आए यह मंज़ूर नहीं।

तालिबे-दीद पर आँच आए यह मंज़ूर नहीं। दिल में है वरना वो बिजली जो सरे-तूर नहीं॥ दिल से नज़दीक है, आँखों से भी कुछ दूर नहीं। मगर इस पर भी…