Category Archives: Moulana Rumi

एक

वो बेमकान, खुदा का नूर जिसके अन्दर है उसको माज़ी, मुस्तक़्बिल व हाल किधर है ? तेरे रिश्ते से है माज़ी और मुस्तक़्बिल वो एक चीज़ है दोनों, तू समझता…

पहाड़

पहाड़ की गूंज ख़ुद से आगाह नहीं है पहाड़ की अक़ल को रूह से राह नहीं है बेकान व बेहोश वो बस आवाज़ करता है जब तुम चुप हो गए,…

मस्जिद

बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त यहीं है सरवरों के दिल के सिवा मस्जिद नहीं…

मुख़ालिफ़

  खुदा ने रंज व ग़म इस लिए हैं बनाए ताकि ख़िलाफ़ उसके खुशी नज़र आए मुख़ालफ़त से सारी चीज़ें होती हैं पैदा कोई नहीं मुख़ालिफ़ उसका वो है छिपा…

हू से हवा में

शकलें बेशकली से बाहर आईं, गई उसी में क्योंकि ‘सच है हम वापस लौटते उसी में’ तू मर रहा हर दम व वापस हो रहा हर दम कहा मुस्तफ़ा ने…

रहबर

  रहबर का साया खुदा के ज़िक़्र से बेहतर है सैंकड़ों खानों व पकवानों से सबर बेहतर है देखने वाले की आंख सौ लाठियों से बेहतर है आंख पहचान लेती…

मोमिन के दिल

कहा पैग़म्बर ने हक़ ने है फ़रमाया न किसी ऊँचे में न नीचे में हूँ समाया अर्श भी नहीं, न ज़मीन व न आसमान समा सकता है मुझे, प्यारे यकीन…

जंग और जलाल

चूंकि नबियों में वो रसूल रखते थे तलवार उनकी उम्मत में हैं जवांमर्द और जंगवार जंग और जलाल हमारे दीन की निशानी है परबत व गुफ़ा ईसाई दीन में पाई…

रूह के राज़

  जब देखो कोई अपना खोल दो रूह के राज़ देखो फूल तो गाओ जैसे बुलबुल बाआवाज़ लेकिन जब देखो कोई धोखे व मक्कारी भरा लब सी लो और बना…

दर्द

दर्द पुरानी दवा को नया बना देता है दर्द उदासी की हर शाख़ काट देता है दर्द चीज़ों को नया बनाने का कीमिया है मलाल कैसे हो उठ गया दर्द…

इश्क़

  इश्क़ हरा देता है सब को, मैं हारा हुआ हूं खारे इश्क़ से शक्कर सा मीठा हुआ हूं ऐ तेज़ हवा ! मैं सूखा पत्ता सामने तेरे हूं जानता…

तौबा 1

  तन मेरा और रग मेरी तुम से भरी हुईं है तौबा को रखने की मुझ में जगह नहीं है तो तय है कि तौबा को दिल से निकाल दूं…