Category Archives: Momin Khan ‘Momin’

दफ़्न जब ख़ाक में हम सोख़्ता-सामाँ होंगे

दफ़्न जब ख़ाक में हम सोख़्ता-सामाँ होंगे फ़ल्स-ए-माही के गुल शम्अ-ए-शबिस्ताँ होंगे नावक अंदाज़ जिधर दीदा-ए-जानाँ होंगे नीम-बिस्मिल कई होंगे कई बेजाँ होंगे ताब-ए-नज़्ज़ारा नहीं आईना क्या देखने दूँ, और…

डर तो मुझे किसका है के मैं कुछ नहीं कहता| 

डर तो मुझे किसका है के मैं कुछ नहीं कहता| पर हाल ये अफ़्शाँ है के मैं कुछ नहीं कहता| नासेह ये गिला है के मैं कुछ नहीं कहता, तू…

मार ही डाल मुझे चश्म-ए-अदा से पहले| 

मार ही डाल मुझे चश्म-ए-अदा से पहले| अपनी मंज़िल को पहुँच जाऊं क़ज़ा से पहले| इक नज़र देख लूँ आ जाओ क़ज़ा से पहले, तुम से मिलने की तमन्ना है…

जलता हूँ हिज्र-ए-शाहिद-ओ-याद-ए-शराब में| 

जलता हूँ हिज्र-ए-शाहिद-ओ-याद-ए-शराब में| शौक़-ए-सवाब ने मुझे डाला अज़ाब में| कहते हैं तुम को होश नहीं इज़्तराब में, सारे गिले तमाम हुए एक जवाब में| फैली शमीम-ए-यार मेरे अश्क-ए-सुर्ख़ से,…

शब तुम जो बज़्म-ए-ग़ैर में आँखें चुरा गये| 

शब तुम जो बज़्म-ए-ग़ैर में आँखें चुरा गये| खोये गये हम ऐसे के अग़्यार पा गये| मजलिस में उस ने पान दिया अपने हाथ से, अग़्यार सब्ज़ बख़्त थे हम…

शब-ए-ग़म-ए-फ़ुर्क़त हमें क्या क्या मज़े दिखलाए था| 

शब-ए-ग़म-ए-फ़ुर्क़त हमें क्या क्या मज़े दिखलाए था| दम रुके था सीने में कम्बख़्त जी घबराए था| बल बे अय्यारी अदू के आगे वो पैमान शिकन, वादा-ए-वस्ल फिर करता था और…

मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहते 

मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहते थके तुम न “बस, बस, सुना!” कहते कहते मुझे चुप लगी मुद्द’आ कहते कहते, रुके हैं वो क्या जाने क्या कहते कहते ज़बाँ गुंग है इश्क़…

आहे-फ़लक-फ़ुग़न तेरे ग़म से कहाँ नहीं

आहे-फ़लक-फ़ुग़न तेरे ग़म से कहाँ नहीं जो फ़ितनाख़ेज़ अब है ज़मीं आसमाँ नहीं कहना पड़ा मुझे पये-इल्ज़ाम-पंद-गो वह माजरा जो लायक़े-शरह-ओ-बयाँ नहीं डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़े…

ख़ुदा की याद दिलाते थे नज़अ में अहबाब

ख़ुदा की याद दिलाते थे नज़अ में अहबाब हज़ार शुक्र कि उस दम वह बदगु़माँ न हुआ मय न उतरी गले से जो उस बिन मुझको यारों ने पारसा जाना…

जहाँ से शक्ल को तेरी तरस-तरस गुज़रे

जहाँ से शक्ल को तेरी तरस-तरस गुज़रे जो मुझपे बस न चला, अपने जी से बस गुज़रे बनी है सूरे-सराफ़ील आह बे-तासीर कि मेरे सम पे क़यामत नफ़स-नफ़स गुज़रे न…

हरदम रहीने-कशमकशे-दस्ते-यार है

हरदम रहीने-कशमकशे-दस्ते-यार है चिलमन के तार, किसके गरेबाँ का तार है क्या कीजिए कि ताक़ते-नज़्ज़ार ही नहीं जितने वह बेहिजाब हैं, हम शर्मसार हैं उम्रे-दराज़ की है रक़ीबों को आरज़ू…

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गये नाचार जी से हम हँसते जो देखते हैं किसी को किसी से हम मुँह देख-देख…