Category Archives: Mirza Raza ‘Bark’

न कोई उन के सिवा और जान-ए-जाँ देखा

न कोई उन के सिवा और जान-ए-जाँ देखा वही वही नज़र आएगा जहाँ जहाँ देखा बहिशत में भी उसी हूर को रवाँ देखा यहाँ जो देख चुके थे वहीं वहाँ…

ज़ेर-ए-ज़मीं हूँ तिश्ना-ए-दीदार-ए-यार का

ज़ेर-ए-ज़मीं हूँ तिश्ना-ए-दीदार-ए-यार का आलम वही है आज तलक इंतिज़ार का गुज़रा शराब पीने से ले कौन दर्द-ए-सर साक़ी दिमाग़ किस को है रंज-ए-ख़ुमार का महशर के रोज़ भी न…

रंग से पैरहन-ए-सादा हिनाई हो जाए

रंग से पैरहन-ए-सादा हिनाई हो जाए पहने ज़ंजीर जो चाँदी की तलाई हो जाए ख़ुद-फ़रोशी को जो तू निकले ब-शक्ल-ए-यूसुफ़ ऐ सनम तेरी ख़रीदार ख़ुदाई हो जाए ख़त-तोअम की तरह…

पर्दा उलट के उस ने जो चेहरा दिखा दिया

पर्दा उलट के उस ने जो चेहरा दिखा दिया रंग-ए-रूख़-ए-गुलिस्ताँ उड़ा दिया वहशत में कै़द-ए-दैर-ओ-हरम दिल से उठ गई हक़्क़ा कि मुझ को इश्क़ ने रस्ता बता दिया फिर झाँक-ताक…

मैं अगर रोने लगूँ रूतबा-ए-वाला बढ़ जाए

मैं अगर रोने लगूँ रूतबा-ए-वाला बढ़ जाए पानी देने से निहाल-ए-क़द-ए-बाला बढ़ जाए जोश-ए-वहशत यही कहता है निहायत कम है दो जहाँ से भी अगर वसुअत-ए-सहरा बढ़ जाए क़ुमरियाँ देख…

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता हम जा नहीं सकते उन्हें आना नहीं मिलता फिरते हैं वहाँ आप भटकती हैं यहाँ रूह अब गोर में भी हम को ठिकाना…

गया शबाब ने पैग़ाम-ए-वस्ल-ए-यार आया

गया शबाब ने पैग़ाम-ए-वस्ल-ए-यार आया जला दो काट के इस नख़्ल में न बार आया क़दम अदम में ये कह कर रखूँगा ऐ क़ातिल हज़ार शुक्र कि मैं बार-ए-सर उतार…

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है नहीं बचता नहीं बचता नहीं बचता आशिक़ पूछते क्या हो शब-ए-हिज्र में क्या होता…