Category Archives: Mir ‘Taskin’ Dehlavi

उस कू मैं हुए हम वो लब-ए-बाम न आया

उस कू मैं हुए हम वो लब-ए-बाम न आया ऐ जज़्बा-ए-दिल तू भी किसी काम न आया था मेरी तरह ग़ैर को भी दावा-ए-उल्फ़त नासेह तू उसे देने का इल्ज़्ााम…

रहने वालों को तेरे कूचे के ये क्या हो गया

रहने वालों को तेरे कूचे के ये क्या हो गया मेरे आते ही यहाँ हँगामा बरपा हो गया तेरा आना था तसुव्वुर में तमाशा शम्मा-रू मेरे दिल पर रात परवानों…

क्या क्या मज़े से रात की अहद-ए-शबाब में

क्या क्या मज़े से रात की अहद-ए-शबाब में छोडूँ न उम्र ए रफ़्ता गर आ जाए ख़्वाब में इक दिल के वास्ते ये फँसे वो अज़ाब में रहते हैं अपनी…

हुए थे भाग के पर्दे में तुम निहाँ क्यूँकर

हुए थे भाग के पर्दे में तुम निहाँ क्यूँकर वो पहली वस्ल की शब शोख़ियाँ थीं हाँ क्यूँकर फ़लक को देख के कहता हूँ जोश-ए-वहशत में इलाही ठहरे मेरी आह…

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते तो अपने दर की आ के वो दीवार खींचते नाज़ ओ अदा ओ ग़म-ज़ा से यूँ दिल लिया मेरा ले जाएँ जैसे मस्त…

फ़र्क़ कुछ तो चाहिए अग़्यार से

फ़र्क़ कुछ तो चाहिए अग़्यार से सिर्र-ए-उल्फ़त मि छुपाएँ यार से अपनी आँखों ये अगर तशबीह हूँ अश्क टपके रोज़न-ए-दीवार से बात उन की मोतबर है सच कहा हाल मेरा…

दिल किस की तेग़-ए-नाज़ से लज़्जत-चशीदा है

दिल किस की तेग़-ए-नाज़ से लज़्जत-चशीदा है हर जख़्म शौक़ से लब-ए-हसरत-गज़ीदा है इस गर्म-ए-इजि़्तराब से दिल जल गया ख़ुदा पहलू में मेरे दिल है के बर्क़-ए-तपीदा है चूसा दहान-ए-ज़ख़्म…

बे-मेहर कहते हो उसे जो बे-वफ़ा नहीं

बे-मेहर कहते हो उसे जो बे-वफ़ा नहीं सच है के बे-वफ़ा हूँ मैं तुम तुम बे-वफ़ा नहीं उक़्दा जो दिल में है मेरे होने का वा नहीं जब तक के…