Category Archives: Meera Bai

माई री! मैं तो लियो गोविंदो मोल

माई री! मैं तो लियो गोविंदो मोल। कोई कहै छानै, कोई कहै छुपकै, लियो री बजंता ढोल। कोई कहै मुहंघो, कोई कहै सुहंगो, लियो री तराजू तोल। कोई कहै कारो,…

माई म्हां गोविन्द, गुण गास्यां

माई म्हां गोविन्द, गुण गास्यां।।टेक।। चरणम्रति रो नेम सकारे, नित उठ दरसण आस्यां। हरि मन्दिर मां निरत करावां घूँघरयां घमकास्यां। स्याम नाम रो झांझ चलास्यां, भोसागर तर जास्यां। यो संसार…

माई म्हारी हरिहूँ न बूझयाँ बात

  माई म्हारी हरिहूँ न बूझयाँ बात।।टेक।। पड माँसू प्राण पापी, निकसि क्यूं णा जात। पटा णाँ खोल्या मुखाँ णा बोल्या, सांझ भयाँ प्रभात। अबोलणां जुग बीतण लागा कायाँरी कुसलात।…

माई म्हाणो सुपणा मां परण्यां दीनानाथ

माई म्हाणो सुपणा मां परण्यां दीनानाथ। छप्पण कोटां जणां पधारयां दूल्हो सिरी व्रजनाथ। सुपणा मां तोरण बेंध्यारी सुपणामां गह्या हाथ। सुपणां मां म्हारे परण गया पायां अचल सुहाग। मीरां रो…

माई मेरो मोहने मन हर्यो

माई मेरो मोहने मन हर्यो।।टेक।। कहा करूँ कित जाऊं सजनी, प्रान पुरूष सूं बर्यो। हूँ जल भरने जात थी सजनी, कलस माथे करयो। साँवरी सी किसोर मूरत, कछुक टोनो करयो।…

माई मेरो मोहनमें मन हारूं

माई मेरो मोहनमें मन हारूं॥टेक॥ कांह करुं कीत जाऊं सजनी। प्रान पुरससु बरयो॥१॥ हूं जल भरने जातथी सजनी। कलस माथे धरयो॥२॥ सावरीसी कीसोर मूरत। मुरलीमें कछु टोनो करयो॥३॥ लोकलाज बिसार…

माई तेरो काना कोन गुनकारो

माई तेरो काना कोन गुनकारो। जबही देखूं तबही द्वारहि ठारो॥टेक॥ गोरी बावो नंद गोरी जशू मैया। गोरो बलिभद्र बंधु तिहारे॥१॥ कारो करो मतकर ग्वालनी। ये कारो सब ब्रजको उज्जारो॥२॥ जमुनाके…

मनुवा बाबारे सुमरले मन सिताराम

मनुवा बाबारे सुमरले मन सिताराम॥टेक॥ बडे बडे भूपती सुलतान उनके। डेरे भय मैदान॥१॥ लंकाके रावण कालने खाया। तूं क्या है कंगाल॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर लाल। भज गोपाल त्यज जंजाल॥३॥

मन रे परसि हरिके चरण

मन रे परसि हरिके चरण। सुभग सीतल कंवल कोमल, त्रिविध ज्वाला हरण। जिण चरण प्रहलाद परसे, इंद्र पदवी धरण।। जिण चरण ध्रुव अटल कीन्हे, राख अपनी सरण। जिण चरण ब्रह्मांड…

मन मोहन दिलका प्यारा

मन मोहन दिलका प्यारा॥टेक॥ माता जसोदा पालना हलावे। हातमें लेकर दोरा॥१॥ कबसे अंगनमों खडी है राधा। देखे किसनका चेहरा॥२॥ मोर मुगुट पीतांबर शोभे। गळा मोतनका गजरा॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर।…

मनमोहन गिरिवरधारी

मनमोहन गिरिवरधारी॥टेक॥ मोर मुकुट पीतांबरधारी। मुरली बजावे कुंजबिहारी॥१॥ हात लियो गोवर्धन धारी। लिला नाटकी बांकी गत है न्यारी॥२॥ ग्वाल बाल सब देखन आयो। संग लिनी राधा प्यारी॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर…

मन माने जब तार प्रभुजी

मन माने जब तार प्रभुजी॥टेक॥ नदिया गहेरी नाव पुराणी। कैशी उतरु पार॥१॥ पोथी पुरान सब कुच देखे। अंत न लागे पार॥२॥ मीर कहे प्रभु गिरिधर नागर। नाम निरंतर सार॥३॥