Category Archives: Mahshar Inayati

ज़ुल्म है हुस्न को एहसास ज़रा हो जाना

ज़ुल्म है हुस्न को एहसास ज़रा हो जाना क्यूँ के एहसास के मानी हैं ख़ुदा हो जाना उन की मुख़्तार-मिज़ाजी ने किया है ऐलान जब्र का नाम है पाबन्द-ए-वफ़ा हो…

ये जान कर के फूल नहीं इख़्तियार के

ये जान कर के फूल नहीं इख़्तियार के काँटे चुने हैं मैं ने चमन में बहार के हिम्मत ब-ख़ैर देख रहा हूँ गुज़ार के कुछ लम्हे और वो भी तेरे…

तेरे सुलूक-ए-तग़ाफुल

तेरे सुलूक-ए-तग़ाफुल से हो के सौदाई चला हूँ मैं तो कुछ आगे चली है रूसवाई नया नया है अभी जज़्बा-ए-ख़ुद-आराई ख़ुदा करे के न आए ख़याल-ए-यकताई तबीअतों में बड़ा इख़्तिलाफ़…

तदारूक़-ए-ग़म हर सुब्ह

तदारूक़-ए-ग़म हर सुब्ह ओ शाम करते रहे के हम परस्तिश-ए-मीना-ओ-जाम करते रहे बता गए हैं उसूल-ए-ख़ुलूस-ओ-हम-दर्दी वो बाज़ फूल जो पत्थर का काम करते रहे क़दम तो रख न सके…

सब ने बना बना के तमाशा हमें तुम्हें

सब ने बना बना के तमाशा हमें तुम्हें हैरत हुई जो ग़ौर से देखा हमें तुम्हें दुनिया ने बार बार पुकारा हमें तुम्हें क्या दौर था के होश नहीं था…

सँवारे है गेसू तो देखा करे है

सँवारे है गेसू तो देखा करे है वो अब दिल को आईना जाना करे है न बातें करे है न देखा करे है मगर मेरे बारे में सोचा करे है…

नींद की आँख मिचोली से मज़ा लेती हैं

नींद की आँख मिचोली से मज़ा लेती हैं फेंक देते हैं किताबों को उठा लेते है भूला भटका सा मुसाफ़िर कोई शायद मिल जाए दो क़दम चलते हैं आवाज़ लगा…

न जाने रफ़्ता रफ़्ता क्या से क्या होते गए हम तुम

न जाने रफ़्ता रफ़्ता क्या से क्या होते गए हम तुम के जितनी एहतियातें कीं जुदा होते गए हो हम तुम वफ़ा हम ने नहीं छोड़ी जफ़ा तुम ने नहीं…

न ग़ैर ही मुझे समझो न दोस्त ही समझो

न ग़ैर ही मुझे समझो न दोस्त ही समझो मेरे लिए ये बहुत है के आदमी समझो मैं रह रहा हूँ ज़माने में साए की सूरत जहाँ भी जाओ मुझे…

मुसर्रतों की साअतों में इख़्तेसार

मुसर्रतों की साअतों में इख़्तेसार कर लिया हयात-ए-ग़म को हम ने और साज़-गार कर लिया क़सम जब उस ने खाई हम ने ऐतबार कर लिया ज़रा सी देर ज़िंदगी को…

मैं तो ज़िंदगी चाहूँ ज़िंदगी ख़ुशी चाहे

मैं तो ज़िंदगी चाहूँ ज़िंदगी ख़ुशी चाहे उन की बात रहने दो उन का जो भी जी चाहे राज़ ये गुलिस्ताँ का हल न हो सका अब तक ख़ार क्यूँ…

लब पे इक नाम हमेशा की तरह

लब पे इक नाम हमेशा की तरह और क्या काम हमेशा की तरह दिन अगर कोई गुज़ारे भी तो क्या फिर वही शाम हमेशा की तरह देख कर उन को…