Category Archives: Daag dehlavi

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई…

रू-ए- अनवर नहीं देखा जाता

रू-ए- अनवर नहीं देखा जाता देखें क्योंकर नहीं देखा जाता रश्के-दुश्मन भी गवारा लेकिन तुझको मुज़्तर नहीं देखा जाता दिल में क्या ख़ाक उसे देख सके जिसको बाहर नहीं देखा जाता तौबा के बाद…

मुमकिन नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो

मुमकिन नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो क्या लुत्फ़े-इन्तज़ार जो तू हीला-जू न हो किस काम का विसाल अगर आरज़ू न हो ख़लवत में तुझको…

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने क्यों है ऐसा उदास क्या जाने कह दिया मैं ने हाल-ए-दिल अपना इस को तुम जानो या ख़ुदा जाने जानते जानते ही जानेगा…