Category Archives: Bhartendu Harishchandra

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा हो 

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा हो नहीं कुछ ख़ौफ़ मेरा भी ख़ुदा है ये दर-पर्दा सितारों की सदा है गली-कूचा में गर कहिए बजा है रक़ीबों में वो होंगे…

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी मौत भी मेरी एक तमाशा आलम को दिखलाएगी महव-ए-अदा हो जाऊँगा गर वस्ल में वो शरमाएगी बार-ए-ख़ुदाया दिल की हसरत कैसे फिर…

रहे न एक भी बेदाद-गर सितम बाक़ी 

रहे न एक भी बेदाद-गर सितम बाक़ी रुके न हाथ अभी तक है दम में दम बाक़ी उठा दुई का जो पर्दा हमारी आँखों से तो काबे में भी रहा…

असीरान-ए-क़फ़स सेहन-ए-चमन को याद करते हैं 

असीरान-ए-क़फ़स सेहन-ए-चमन को याद करते हैं भला बुलबुल पे यूँ भी ज़ुल्म ऐ सय्याद करते हैं कमर का तेरे जिस दम नक़्श हम इजाद करते हैं तो जाँ फ़रमान आ…

दिल मिरा तीर-ए-सितमगर का निशाना हो गया 

दिल मिरा तीर-ए-सितमगर का निशाना हो गया आफ़त-ए-जाँ मेरे हक़ में दिल लगाना हो गया हो गया लाग़र जो उस लैला-अदा के इश्क़ में मिस्ल-ए-मजनूँ हाल मेरा भी फ़साना हो…

फिर मुझे लिखना जो वस्फ़-ए-रू-ए-जानाँ हो गया 

फिर मुझे लिखना जो वस्फ़-ए-रू-ए-जानाँ हो गया वाजिब इस जा पर क़लम को सर झुकाना हो गया सर-कशी इतनी नहीं ज़ालिम है ओ ज़ुल्फ़-ए-सियह बस कि तारीक अपनी आँखों में…

ग़ज़ब है सुरमः देकर आज वह बाहर निकलते हैं

ग़ज़ब है सुरमः देकर आज वह बाहर निकलते हैं । अभी से कुछ दिल मुज़्तर पर अपने तीर चलते हैं । ज़रा देखो तो ऐ अहले सखुन ज़ोरे सनाअत को । नई बंदिश…

ख़याले नावके मिजगाँ में बस हम सर पटकते हैं

ख़याले नावके मिजगाँ में बस हम सर पटकते हैं । हमारे दिल में मुद्दत से ये ख़ारे  ग़म खटकते हैं । रुख़े रौशन पै उसके गेसुए शबगूँ लटकते हैं । कयामत है मुसाफ़िर रास्तः दिन को…

उसको शाहनशही हर बार मुबारक होवे

विक्तोरिया शाहेशाहान हिन्दोस्तान उसको शाहनशही हर बार मुबारक होवे। कैसरे हिन्द का दरबार मुबारक होवे। बाद मुद्दत के हैं देहली के फिरे दिन या रब। तख़्त ताऊस तिलाकार मुबारक होवे।…

गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में

गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में बुझे दिल की लगी भी तो ऐ यार होली में नहीं ये है गुलाले-सुर्ख उड़ता हर जगह प्यारे ये आशिक की है…