Category Archives: Behzaad Lakhnavi

वो कहते हैं यकीं लाना पड़ेगा

वो कहते हैं यकीं लाना पड़ेगा ये धोखा जान कर खाना पड़ेगा ज़माने को बदलना हम ने ठाना ज़माने को बदल जाना पड़ेगा सलामत है हमारा जज़्बे-उल्फ़त तुम आओगे तुम्हें…

तुम याद मुझे आ जाते हो 

तुम याद मुझे आ जाते हो जब सेहन-ए-चमन में कलियाँ खिल कर फूल की सूरत होती हैं और अपनी महक से हर दिल में इक तुख़्म-ए-लताफ़त बोती हैं तुम याद…

होता जो कोई दूसरा 

होता जो कोई दूसरा करता गिला मैं दर्द का तुम तो हो दिल का मुद्दआ’ तुम से शिकायत क्या करूँ देखो है बुलबुल नाला-ज़न कहती है अहवाल-ए-चमन मैं चुप हूँ…

ज़िन्दा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िन्दगी नहीं

ज़िन्दा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िन्दगी नहीं जलता हुआ दिया हूँ मगर रोशनी नहीं वो मुद्दतें हुईं हैं किसी से जुदा हुए लेकिन ये दिल की आग अभी तक बुझी…

यूँ तो जो चाहे यहाँ साहब-ए-महफ़िल हो जाए 

यूँ तो जो चाहे यहाँ साहब-ए-महफ़िल हो जाए बज़्म उस शख़्स की है तू जिसे हासिल हो जाए नाख़ुदा ऐ मिरी कश्ती के चलाने वाले लुत्फ़ तो जब है कि…

उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं 

उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं हाँ, बता दे ऐ जबीन-ए-शौक़, क्या समझा था मैं अल्लाह-अल्लाह क्या इनायत कर गई मिज़राब-ए-इश्क़ वर्ना साज़-ए-ज़िन्दगी को…

तुझ पर मिरी मोहब्बत क़ुर्बान हो न जाए 

तुझ पर मिरी मोहब्बत क़ुर्बान हो न जाए ये कुफ़्र बढ़ते-बढ़ते ईमान हो न जाए अल्लाह री बे-नक़ाबी उस जान-ए-मुद्दआ की मेरी निगाह-ए-हसरत हैरान हो न जाए मेरी तरफ़ न…

तिरे इश्क़ में ज़िन्दगानी लुटा दी 

तिरे इश्क़ में ज़िन्दगानी लुटा दी अजब खेल खेला जवानी लुटा दी नहीं दिल में दाग़-ए-तमन्ना भी बाक़ी उन्हीं पर से उन की निशानी लुटा दी कुछ इस तरह ज़ालिम…

मोहब्बत मुस्तक़िल कैफ़-आफ़रीं मालूम होती है 

मोहब्बत मुस्तक़िल कैफ़-आफ़रीं मालूम होती है ख़लिश दिल में जहाँ पर थी वहीं मालूम होती है तिरे जल्वों से टकरा कर नहीं मालूम होती है नज़र भी एक मौज-ए-तह-नशीं मालूम…

फ़रियाद है अब लब पर जब अश्क-फ़िशानी थी 

फ़रियाद है अब लब पर जब अश्क-फ़िशानी थी ये और कहानी है वो और कहानी थी अब दिल में रहा क्या है जुज़ हसरत-ओ-नाकामी वो नीश कहाँ बाक़ी ख़ुद जिस…

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं 

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं तेरे बग़ैर ज़ीस्त तो है ज़िन्दगी नहीं मैं दर्द-ए-आशिक़ी को समझता हूँ जान-ओ-रूह कम्बख़्त वो भी दिल में कभी है कभी…

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ 

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ मगर हाँ दिल में कुछ कुछ ज़ेर-ओ-बम महसूस करता हूँ मोहब्बत की ये नैरंगी भी दुनिया से निराली है अलम कोई…