Category Archives: Bashir Badr

सर से चादर बदन से क़बा ले गई

सर से चादर बदन से क़बा ले गई ज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई मेरी मुठ्ठी में सूखे हुये फूल हैं ख़ुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गई मैं…

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है…

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी…

जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे

जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे हुई शाम यादों के इक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे घड़ी दो घड़ी मुझको पलकों पे रख…

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में हर…

कोई चिराग़ नहीं है मगर उजाला है 

कोई चिराग़ नहीं है मगर उजाला है ग़ज़ल की शाख़ पे इक फूल खिलने वाला है ग़ज़ब की धूप है इक बे-लिबास पत्थर पर पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला…

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं 

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं किसको तलाश करते रहे कुछ पता नहीं शिद्दत की धूप तेज़ हवाओं के बावजूद मैं शाख़ से गिरा हूँ नज़र से गिरा नहीं…

सात रंगों के शामियाने हैं दिल के मौसम बड़े सुहाने हैं

सात रंगों के शामियाने हैं दिल के मौसम बड़े सुहाने हैं कोई तदबीर भूलने की नहीं याद आने के सौ बहाने हैं दिल की बस्ती अभी कहाँ बदली ये मौहल्ले…

किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना

किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना सियासत की अपनी अलग इक ज़बाँ है लिखा हो जो इक़रार, इनकार पढ़ना अलामत नये शहर की…