Category Archives: Babu Mahesh Narayan

दिल में उसके थी एक अजब हलचल

दिल में उसके थी एक अजब हलचल आत्मा थी फ़ड़कती औ बेकल धीरता भी बनाती थी चंचल, व्यग्रता आंख में थी लाती जल प्रीत जब रोते रोते थक जाती, वालों…

कभी मुंह गुस्से में होता लाल,

कभी मुंह गुस्से में होता लाल, कभी सर को झुकाये वह करती मलाल, कभी बरहम शौक़ से होता था, कभी पेहम मोती पिरोती थी, कभी आशा से थी ललचती वह,…

मुख मलीन मृग लोचन शुष्क

मुख मलीन मृग लोचन शुष्क शशि की कला में बहार नहीं थी; लब दबे यौवन उभरे रति की छटा रलार नहीं थी। गरभ, हवस, अफ्सोस, उम्मीद, प्रेम-प्रकाश, भय चंचल चित…

बिजली की चमक में

बिजली की चमक में रौशन हुआ चिहरा, देखा तो परी है नाजों से भरी है, घुंघर वाले बाल मखमल के दो गाल तवा नाज़ुक प उस के कुछ था मलाल।…

उस कोलाहल में ध्वनि उसकी

उस कोलाहल में ध्वनि उसकी दबती दबती आती थी दया, प्रेम, भक्ति और हित की ठुनुक ठुनुक के बुलाती थी- अरे नयनों के सितारे! “मेरे प्यारे! अरे आरे!”- आवाज़ यही…

रोने की आवाज़ आती है? कहाँ? वह

रोने की आवाज़ आती है? कहाँ? वह, उफ़ नहीं। हा, अहा। वहाँ वह! है तो कोई अबला की ध्वनि और प्रीत के रस की है माती हुई। अबला का वहाँ…

पानी पड़ने लगा वह मूसल धार

पानी पड़ने लगा वह मूसल धार मानों इन्द्र की द्वार खुली हो। बादल की गरज से जी दहलता बिजली की चमक से आँखैं झिपतीं बायु की लपट से दिल था…

सब्ज़े का बना था शामियाना

सब्ज़े का बना था शामियाना और सब्ज़ ही मख्मली बिछौना; फूलों से बसा हुआ वह था कुंज। था प्रीत मिलन के योग्य वह कुंज; परपोश हवा के रहने वाले दिलकुश…

एक कुंज

एक कुंज, बहुत गुंज, पेड़ों से घिरा था झरने के बग़ल में बिजली की चमक भी न पहुँचती थी वहाँ तक ऐसा वह घिरा था जस दीप हो जल में…

पहाड़ी पै पत्थर के चट्टाँ बड़े

पहाड़ी पै पत्थर के चट्टाँ बड़े, समय की सृष्टि से वाँ थे खड़े, अजब एक सनत से खड़े थे वह सारे, ज़री सी ज़मीं पर बहुत ही किनारे; अगर लोग…

रात अन्धेरी में पहाड़ी की डरौनी मूर्ति

रात अन्धेरी में पहाड़ी की डरौनी मूर्ति कैफ़ियत एक मनोहर थी वह पैदा करती- एक कैफ़ियत मनोहर देखें तो होवें शशदर सुन्दर भयंकर। दरख़्तों की हू हू, पबन की लपट,…

वह राक्षसी उजाला

वह राक्षसी उजाला, बहके हुए मनुष्य को करती है जो तबाह मैदान पुर खतर में वाँ भी चमक भुलावनी अपनी दिखाती थी। ज़िन्दगी में बहुत ऐसी ही चमकती हुई चीज़…