Category Archives: poet name B

ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तेरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई

ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तेरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई हम को अपनी तीरा-रोज़ी की हक़ीक़त खुल गई. क्या तमाशा है रग-ए-लैला में डूबा नीश्तर फ़स्द-ए-मजनूँ बाइस-ए-जोश-ए-मोहब्बत खुल गई. दिल का…

ये क़िस्सा वो नहीं तुम जिस को क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो

ये क़िस्सा वो नहीं तुम जिस को क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो मेरे फ़साना-ए-ग़म को मेरी ज़बाँ से सुनो. सुनाओ दर्द-ए-दिल अपना तो दम-ब-दम फ़रयाद मिसाल-ए-नय मेरी हर एक उस्तुख़्वाँ से सुनो.…

वाक़िफ़ हैं हम के हज़रत-ए-ग़म ऐसे शख़्स हैं

वाक़िफ़ हैं हम के हज़रत-ए-ग़म ऐसे शख़्स हैं और फिर हम उन के यार हैं हम ऐसे शख़्स हैं. दीवाने तेरे दश्त में रखेंगे जब क़दम मजनूँ भी लेगा उन…

वाँ रसाई नहीं तो फिर क्या है

वाँ रसाई नहीं तो फिर क्या है ये जुदाई नहीं तो फिर क्या है. हो मुलाक़ात तो सफ़ाई से और सफ़ाई नहीं तो फिर क्या है. दिल-रुबा को है दिल-रुबाई…

वाँ इरादा आज उस क़ातिल के दिल में और है

वाँ इरादा आज उस क़ातिल के दिल में और है और यहाँ कुछ आरज़ू बिस्मिल के दिल में और है. वस्ल की ठहरावे ज़ालिम तो किसी सूरत से आज वर्ना…

टुकड़े नहीं हैं आँसुओं में दिल के चार पाँच

टुकड़े नहीं हैं आँसुओं में दिल के चार पाँच सुरख़ाब बैठे पानी में हैं मिल के चार पाँच. मुँह खोले हैं ये ज़ख़्म जो बिस्मिल के चार पाँच फिर लेंगे…

तफ़्ता-जानों का इलाज ऐ अहल-ए-दानिश और है

तफ़्ता-जानों का इलाज ऐ अहल-ए-दानिश और है इश्क़ की आतिश बला है उस की सोज़िश और है. क्यूँ न वहशत में चुभे हर मू ब-शक्ल-ए-नीश-तेज़ ख़ार-ए-ग़म की तेरे दीवाने की…

शाने की हर ज़बाँ से सुने कोई लाफ़-ए-ज़ुल्फ़

शाने की हर ज़बाँ से सुने कोई लाफ़-ए-ज़ुल्फ़ चीरे है सीना रात को ये मू-शगाफ़-ए-ज़ुल्फ़. जिस तरह से के काबे पे है पोशिश-ए-सियाह इस तरह इस सनम के है रुख़…

सब रंग में उस गुल की मेरे शान है मौजूद

सब रंग में उस गुल की मेरे शान है मौजूद ग़ाफ़िल तू ज़रा देख वो हर आन है मौजूद. हर तार का दामन के मेरे कर के तबर्रुक सर-बस्ता हर…

रुख़ जो ज़ेर-ए-सुंबल-ए-पुर-पेच-ओ-ताब आ जाएगा

रुख़ जो ज़ेर-ए-सुंबल-ए-पुर-पेच-ओ-ताब आ जाएगा फिर के बुर्ज-ए-सुंबले में आफ़ताब आ जाएगा. तेरा एहसाँ होगा क़ासिद गर शताब आ जाएगा सब्र मुझ को देख कर ख़त का जवाब आ जाएगा.…

क़ारूँ उठा के सर पे सुना गंज ले चला

क़ारूँ उठा के सर पे सुना गंज ले चला दुनिया से क्या बख़ील ब-जुज़ रंज ले चला. मिन्नत थी बोसा-ए-लब-ए-शीरीं के दिल मेरा मुझ को सोए मज़ार-ए-शकर गंज ले चला.…

पान की सुर्ख़ी नहीं लब पर बुत-ए-ख़ूँ-ख़्वार के

पान की सुर्ख़ी नहीं लब पर बुत-ए-ख़ूँ-ख़्वार के लग गया है ख़ून-ए-आशिक़ मुँह को इस तलवार के. ख़ाल-ए-आरिज़ देख लो हल्क़े में ज़ुल्फ़-ए-यार के मार-ए-मोहरा गर न देखा हो दहन…