Category Archives: shayri by legends

आओ सहेल्हां रली करां है

  आओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि॥ झूठा माणिक मोतिया री झूठी जगमग जोति। झूठा आभूषण री, सांची पियाजी री प्रीति॥ झूठा पाट पटंबरा रे, झूठा दिखडणी…

आओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट

  आओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट।।टेक।। खान पान मोहि नैक न भावै नैणन लगे कपाट॥ तुम आयां बिन सुख नहिं मेरे दिल में बहोत उचाट। मीरा कहै मैं बई…

आई ती ते भिस्ती जनी

  आई ती ते भिस्ती जनी जगत देखके रोई। मातापिता भाईबंद सात नही कोई। मेरो मन रामनाम दुजा नही कोई॥टेक॥ साधु संग बैठे लोक लाज खोई। अब तो बात फैल…

अरे राणा पहले क्यों न बरजी

  अरे राणा पहले क्यों न बरजी, लागी गिरधरिया से प्रती।।टेक।। मार चाहे छाँड, राणा, नहीं रहूँ मैं बरजी। सगुन साहिब सुमरताँ रे, में थाँरे कोठे खटकी। राणा जी भेज्या…

अरज करे छे मीरा रोकडी

  अरज करे छे मीरा रोकडी। उभी उभी अरज॥टेक॥ माणिगर स्वामी मारे मंदिर पाधारो सेवा करूं दिनरातडी॥१॥ फूलनारे तुरा ने फूलनारे गजरे फूलना ते हार फूल पांखडी॥२॥ फूलनी ते गादी…

ज़मीं से आँच ज़मीं तोड़कर निकलती है

ज़मीं से आँच ज़मीं तोड़कर निकलती है अजीब तिश्नगी इन बादलों से बरसी है मेरी निगाह मुख़ातिब से बात करते हुए तमाम जिस्म के कपड़े उतार लेती है सरों पे…

चल मुसाफ़िर बत्तियाँ जलने लगीं 

चल मुसाफ़िर बत्तियाँ जलने लगीं आसमानी घंटियाँ बजने लगीं दिन के सारे कपड़े ढीले हो गए रात की सब चोलियाँ कसने लगीं डूब जायेंगे सभी दरिया पहाड़ चांदनी की नद्दियाँ…

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर नीले बादल के इक गाँव में जायेंगे धूप माथे पे अपने सजा लायेंगे साये पलकों के पीछे छुपा लायेंगे बर्फ पर तैरते रोशनी…

सुनो पानी में किसकी सदा है 

सुनो पानी में किसकी सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा ख़ुदा चारों तरफ़ बिखरा हुआ है समेटो और सीने में…

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे उजले फर के कोट पहने हल्के जाड़े आएँगे गीले-गीले मंदिरों में बाल खोले देवियाँ सोचती हैं उनके सूरज देवता कब आएँगे…

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा फिर नीले-नीले बादलों में लौट जाऊँगा सोने के फूल-पत्ते गिरेंगे ज़मीन पर मैं ज़र्द-ज़र्द शाख़ों पे जब गुनगुनाऊँगा घुल जायेंगी बदन पे जमी…

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो वो फ़िराक़ हो या विसाल हो,…