Category Archives: shayri by legends

काल की महिमा

कबीर टुक टुक चोंगता, पल पल गयी बिहाय | जिन जंजाले पड़ि रहा, दियरा यमामा आय || जो उगै सो आथवै, फूले सो कुम्हिलाय | जो चुने सो ढ़हि पड़ै,…

व्यवहार की महिमा

कबीर गर्ब न कीजिये, इस जीवन की आस | टेसू फूला दिवस दस, खंखर भया पलास || कबीर गर्ब न कीजिये, इस जीवन कि आस | इस दिन तेरा छत्र…

भक्ति की महिमा

भक्ति बीज पलटै नहीं, जो जुग जाय अनन्त | ऊँच नीच घर अवतरै, होय सन्त का सन्त || भक्ति पदारथ तब मिलै, तब गुरु होय सहाय | प्रेम प्रीति की…

सुख-दुःख की महिमा

सुख – दुःख सिर ऊपर सहै, कबहु न छाडै संग | रंग न लागै और का, व्यापै सतगुरु रंग || कबीर गुरु कै भावते, दुरहि ते दीसन्त | तन छीना…

सेवक की महिमा

सवेक – स्वामी एक मत, मत में मत मिली जाय | चतुराई रीझै नहीं, रीझै मन के भाय || सतगुरु शब्द उलंघ के, जो सेवक कहुँ जाय | जहाँ जाय…

संगति की महिमा

कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय | दुरमति दूर बहावासी, देशी सुमति बताय || कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय | खीर खांड़ भोजन मिलै, साकत…

सद्आचरण की महिमा

माँगन गै सो मर रहै, मरै जु माँगन जाहिं | तिनते पहिले वे मरे, होत करत हैं नहिं || अजहूँ तेरा सब मिटै, जो मानै गुरु सीख | जब लग…

साधु महिमा

कबीर सोई दिन भला, जा दिन साधु मिलाय | अंक भरे भरि भेरिये, पाप शरीर जाय || दरशन कीजै साधु का, दिन में कइ कइ बार | आसोजा का भेह…

आचरण की महिमा

चाल बकुल की चलत है, बहुरि कहावै हंस | ते मुक्ता कैसे चुगे, पड़े काल के फंस || बाना पहिरे सिंह का, चलै भेड़ की चाल | बोली बोले सियार…

गुरु-महिमा

गुरु सो ज्ञान जु लीजिये, सीस दीजये दान। बहुतक भोंदू बहि गये, सखि जीव अभिमान॥१॥ गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय। कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय॥२॥…

नायाब इल्म

सोने और रुपये से भर जाय जंगल अगर बिना मर्ज़ी ख़ुदा की ले नहीं सकते कंकर सौ किताबें तुम पढ़ो अगर कहीं रुके बिना नुक़्ता ना रहे याद खुदा की…

दुश्वार

हज़रते ईसा से पूछा किसी ने जो था हुशियार इस हस्ती में चीज़ कया है सबसे ज़्यादा दुश्वार बोले ईसा सबसे दुश्वार ग़ुस्सा ख़ुदा का है प्यारे कि जहन्नुम भी…