Category Archives: shayri by legends

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों ये तो वहशी है तुम्हीं होश में…

हम इन्तज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक

हम इन्तज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक ख़ुदा करे कि क़यामत हो और तू आए यह इन्तज़ार भी एक इम्तिहान होता है इसी से इश्क का शोला जवान होता है यह…

साथी हाथ बढ़ाना

साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिल कर बोझ उठाना साथी हाथ बढ़ाना हम मेहनतवालों ने जब भी मिलकर क़दम बढ़ाया सागर ने रस्ता छोड़ा पर्वत…

वो सुबह कभी तो आएगी

वो सुबह कभी तो आएगी इन काली सदियों के सर से जब रात का आंचल ढलकेगा जब दुख के बादल पिघलेंगे जब सुख का सागर झलकेगा जब अम्बर झूम के…

वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ

किशोर: वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ आशा:…

लागा, चुनरी में दाग, छुपाऊँ कैसे

लागा, चुनरी में दाग, छुपाऊँ कैसे लागा, चुनरी में दाग चुनरी में दाग, छुपाऊँ कैसे, घर जाऊँ कैसे लागा, चुनरी में दाग … हो गई मैली मोरी चुनरिया कोरे बदन…

रात भी है कुछ भीगी- भीगी

रात भी है कुछ भीगी- भीगी, चांद भी है कुछ मद्धम-मद्धम तुम आओ तो आँखें खोले, सोई हुई पायल की छम-छम किसको बताएँ, कैसे बताएँ, आज अजब है दिल का…

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ मैने जज़बात निभाए हैं उसूलों की जगह अपने अरमान पिरो लाया…

ये वादियाँ ये फ़ज़ाएँ

ये वादियाँ ये फ़ज़ाएँ बुला रही हैं तुम्हें ख़ामोशियों की सदाएँ बुला रही हैं तुम्हें तरस रहे हैं जवाँ फूल होंठ छूने को मचल-मचल के हवाएँ बुला रही हैं तुम्हें…

ये देश है वीर जवानों का

ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का ओऽऽऽ ओऽऽऽ ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का इस देश का यारों … होय!! इस देश…

ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं

लता: ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें तसव्वुर में कोई बसता नहीं, हम क्या करें तुम्ही…

ये कूचे ये नीलामघर दिलक़शी के

ये कूचे ये नीलामघर दिलक़शी के ये लुटते हुए कारवां ज़िंदगी के कहां हैं कहां हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं| ये पुरपेंच गलियां ये बेख़्वाब बाज़ार ये गुमनाम…