Category Archives: shayri by legends

ज़मीं से आँच ज़मीं तोड़कर निकलती है

ज़मीं से आँच ज़मीं तोड़कर निकलती है अजीब तिश्नगी इन बादलों से बरसी है मेरी निगाह मुख़ातिब से बात करते हुए तमाम जिस्म के कपड़े उतार लेती है सरों पे…

चल मुसाफ़िर बत्तियाँ जलने लगीं 

चल मुसाफ़िर बत्तियाँ जलने लगीं आसमानी घंटियाँ बजने लगीं दिन के सारे कपड़े ढीले हो गए रात की सब चोलियाँ कसने लगीं डूब जायेंगे सभी दरिया पहाड़ चांदनी की नद्दियाँ…

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर नीले बादल के इक गाँव में जायेंगे धूप माथे पे अपने सजा लायेंगे साये पलकों के पीछे छुपा लायेंगे बर्फ पर तैरते रोशनी…

सुनो पानी में किसकी सदा है 

सुनो पानी में किसकी सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा ख़ुदा चारों तरफ़ बिखरा हुआ है समेटो और सीने में…

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे उजले फर के कोट पहने हल्के जाड़े आएँगे गीले-गीले मंदिरों में बाल खोले देवियाँ सोचती हैं उनके सूरज देवता कब आएँगे…

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा फिर नीले-नीले बादलों में लौट जाऊँगा सोने के फूल-पत्ते गिरेंगे ज़मीन पर मैं ज़र्द-ज़र्द शाख़ों पे जब गुनगुनाऊँगा घुल जायेंगी बदन पे जमी…

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो वो फ़िराक़ हो या विसाल हो,…

राखौ कृपा निधान

अब मैं सरण तिहारी जी, मोहि राखौ कृपा निधान। अजामील अपराधी तारे, तारे नीच सदान। जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढ़ी बिमान। और अधम तारे बहुतेरे, भाखत संत सुजान। कुबजा…

मेरो दरद न जाणै कोय

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय। घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय। जौहरि की गति जौहरी जाणै, की जिन जौहर होय। सूली ऊपर…

म्हारो अरजी

तुम सुणो जी म्हारो अरजी। भवसागर में बही जात हूँ काढ़ो तो थारी मरजी। इण संसार सगो नहिं कोई सांचा सगा रघुबरजी।। मात-पिता और कुटम कबीलो सब मतलब के गरजी।…

हरो जन की भीर

हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, चट बढ़ायो चीर।। भगत कारण रूप नर हरि, धरयो आप समीर।। हिरण्याकुस को मारि लीन्हो, धरयो नाहिन धीर।। बूड़तो गजराज…

तुम बिन नैण दुखारा

म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। तन मन धन सब भेंट धरूंगी भजन करूंगी तुम्हारा। म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये मोमें औगुण सारा।। म्हारे घर आओ प्रीतम…