Category Archives: Zahir Dehlavi

तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ

तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ तुम्हीं ख़ुद ये कह दो बुरा चाहता हूँ कोई मोल ले तो बका चाहता हूँ मैं साहब से बंदा हुआ चाहता हूँ तुम्हीं चाहो…

रंग जमने न दिया बात को चलने न दिया

रंग जमने न दिया बात को चलने न दिया कोई पहलू मेरे मतलब का निकलने न दिया कुछ सहारा भी हमें रोज़-ए-अज़ल ने न दिया दिल बदलने न दिया बख़्त…

फटा पड़ता है जौबन और जोश-ए-नौ-जवानी है

फटा पड़ता है जौबन और जोश-ए-नौ-जवानी है वो अब तो ख़ुद-ब-ख़ुद जामे से बाहर होते जाते हैं नज़र होती है जितनी उन को अपने हुस्न-ए-सूरत पर सितम-गर बे-मुरव्वत कीना-परवर होते…

कुछ न कुछ रंज वो दे जाते हैं आते जाते

कुछ न कुछ रंज वो दे जाते हैं आते जाते छोड़ जाते हैं शिगूफ़े कोई जाते जाते शौक़ बन बन के मेरे दिल में हैं आते जाते दर्द बन बन…

जहाँ में कौन कह सकता है तुम को बे-वफ़ा तुम हो

जहाँ में कौन कह सकता है तुम को बे-वफ़ा तुम हो ये थोड़ी वज़ा-दारी है कि दुश्मन-आश्ना तुम हो तबाही सामने मौजूद है गर आशना तुम हो ख़ुदा हाफ़िज़ है…

दिल गया दिल का निशाँ बाक़ी रहा

दिल गया दिल का निशाँ बाक़ी रहा दिल की जा दर्द-ए-निहाँ बाक़ी रहा कौन ज़ेरे-ए-आसमाँ बाक़ी रहा नेक-नामों का निशाँ बाक़ी रहा हो लिए दुनिया के पूरे कारोबार और इक…

बज़्म-ए-दुश्मन में जा के देख लिया

बज़्म-ए-दुश्मन में जा के देख लिया ले तुझे आज़मा के देख लिया तुम ने मुझ को सता के देख लिया हर तरह आज़मा के देख लिया उन के दिल की…

ऐ मेहर-बाँ है गर यही सूरत निबाह की

ऐ मेहर-बाँ है गर यही सूरत निबाह की बाज़ आए दिल लगाने से तौबा गुनाह की उल्टे गिले वो करते हैं क्यूँ तुम ने चाह की क्या ख़ूब दाद दी…