Category Archives: Wazir Ali ‘sabaa’ Lakhnavi

ये उलझ पड़ने की ख़ू अच्छी नहीं

ये उलझ पड़ने की ख़ू अच्छी नहीं बे-मुहाबा गुफ़्तगू अच्छी नहीं मार डाला इश्तियाक़-ए-यार ने इस क़दर भी आरज़ू अच्छी नहीं झुक के मिल सब से ब-रंग-ए-शाख़-ए-गुल सरकशी ऐ सर्व-ए-जू…

क़ब्र पर बाए-ए-फ़ना आइएगा

क़ब्र पर बाए-ए-फ़ना आइएगा बे-महल पाँव न फैलाइएगा लाख हो वस्ल का वादा लेकिन वक़्त पर साफ़ निकल जाइएगा न करें आप वफ़ा हम को क्या बे-वफ़ा आप ही कहलाइएगा…

ख़ुद-परस्ती का जो सौदा हो गया

ख़ुद-परस्ती का जो सौदा हो गया आप मैं अपना तमाशा हो गया जब मुझे अपनी हक़कीत खुल गई जुज़ से कुल क़तरे से दरिया हो गया जान-ए-शीरीं हम ने किस…

कभी रसाई-ए-आह-जिगर नहीं होती

कभी रसाई-ए-आह-जिगर नहीं होती हमारे दिल की उन्हें कुछ ख़बर नहीं होती पा-ए-तसल्ली-ए-दिल दे दिया है ख़त तुझ को रिसाई यार तक ऐ नाबा-बर नहीं होती दराज़ी-ए-शब-ए-तार-ए-लहद मआज़ अल्लाह बग़ैर-ए-सुब्ह-ए-क़यामत…

इश्क़ का इख़्तिताम करते हैं

इश्क़ का इख़्तिताम करते हैं दिल का क़िस्सा तमाम करते हैं क़हर है क़त्ल-ए-आम करते हैं तुर्क तुर्की तमाम करते हैं ताक़-ए-अब्र से उन के दर गुज़रे हम यहीं से…

दिल साफ हुआ आईना-ए-रू नज़र आया

दिल साफ हुआ आईना-ए-रू नज़र आया सब कुछ नज़र आया जो हमें तू नज़र आया हूरों की तरफ़ लाख हो ज़ाहिद की तवज्जोह खुल जाएँगी आँखें जो कभी तू नज़र…

ऐ ‘सबा’ जज़्ब पे जिस दम दिल-ए-ना-शाद आया

ऐ ‘सबा’ जज़्ब पे जिस दम दिल-ए-ना-शाद आया अपने आग़ोश में उड़ कर वो परी-ज़ाद आया चश्म-ए-मूसा हमा-तन बन या मैं हैरत से देखा इक बुत का वो आलम के…

अब्र हैं दीदा-ए-पुर-आब से हम

अब्र हैं दीदा-ए-पुर-आब से हम बर्क़ हैं दिल के इजि़्तराब से हम सौ तरह की गरज़ निकलती है क्यूँ न मतलब रखें जनाब से हम दम में मौज-ए-फना मिटा देगी…

आज़िम-ए-दश्त-ए-जुनूँ हो के मैं घर से उट्ठा

आज़िम-ए-दश्त-ए-जुनूँ हो के मैं घर से उट्ठा फिर बहार आई क़दम फिर नए सिरे से उट्ठा उम्र भर दिल न मेरा यार के घर से उट्ठा बैठा दीवार के निचे…