Category Archives: Nida Fazli

बस का सफ़र

मैं चाहता हूँ यह चौकोर धूप का टुकड़ा उलझ रहा है जो बालो में इसको सुलझा दूँ यह दाएँ बाजू पर नन्ही-सी इक कली-सा निशान जो अबकी बार दुपट्टा उड़े…

एक बात

उसने अपना पैर खुजाया अँगूठी के नग को देखा उठ कर ख़ाली जग को देखा चुटकी से एक तिनका तोड़ा चारपाई का बान मरोड़ा भरे-पुरे घर के आँगन कभी-कभी वह…

एक ही ग़म

अगर कब्रिस्तान में अलग-अलग कत्बे न हों तो हर कब्र में एक ही ग़म सोया हुआ होता है -किसी माँ का बेटा किसी भाई की बहन किसी आशिक की महबूबा…

क़ौमी एकता

यह तवाइफ़ कई मर्दों को पहचानती है शायद इसीलिए दुनिया को ज़्यादा जानती है -उसके कमरे में हर मज़हब के भगवान की एक-एक तस्वीर लटकी है ये तस्वीरें लीडरों की…

बेख़बरी

पड़ोसी के बच्चे को क्यों डाँटती हो शरारत तो बच्चों का शेवा रहा है बिचारी सुराही का क्या दोष इसमें कभी ताजा पानी भी ठण्डा हुआ है सहेली से बेकार…

इतनी पी जाओ

इतनी पी जाओ कि कमरे की सियह ख़ामोशी इससे पहले कि कोई बात करे तेज नोकीले सवालात करे इतनी पी जाओ कि दीवारों के बेरंग निशान इससे पहले कि कोई…

वक़्त से पहले

यूँ तो हर रिश्ते का अंज़ाम यही होता है फूल खिलता है महकता है बिखर जाता है तुमसे वैसे तो नहीं कोई शिकायत लेकिन- शाख हो सब्ज़ तो हस्सास फ़ज़ा…

दो सोचें

सुबह जब अख़बार ने मुझसे कहा ज़िन्दगी जीना बहुत दुश्वार है सरहदें फिर शोर-गुल करने लगीं ज़ंग लड़ने के लिए तैयार है दरमियाँ जो था ख़ुदा अब वो कहाँ आदमी…

तुमसे मिली नहीं है दुनिया

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया बच्चों के स्कूल में शायद तुमसे मिली नहीं है दुनिया चार घरों के एक मुहल्ले के बाहर भी है आबादी…

एक तस्वीर

सुबह की धूप खुली शाम का रूप फ़ाख़्ताओं की तरह सोच में डूबे तालाब अज़नबी शहर के आकाश धुंधलकों की किताब पाठशाला में चहकते हुए मासूम गुलाब घर के आँगन…

दो नई खिड़कियाँ

आमने-सामने दो नई खिड़कियाँ जलती सिगरेट की लहराती आवाज में सुई-डोरे के रंगीन अल्फाज़ में मशवरा कर रहीं हैं कई रोज़ से शायद अब बूढ़े दरवाजे सिर जोड़कर वक़्त की…

खेल

आओ कहीं से थोड़ी सी मिट्टी भर लाएँ मिट्टी को बादल में गूँथें चाक चलाएँ नए-नए आकार बनाएँ किसी के सर पे चुटिया रख दें माथे ऊपर तिलक सजाएँ किसी…