Category Archives: Nathuram Sharma Shankar

वेदान्त विलास

बाँके बिहारी की बाजी बँसुरिया। वंशी की तानें सुने सारी-सखियाँ, साड़ी सजें धौरी, काली, सिंदुरिया। देखे-दिखावे जिसे रास-रसिया, फोडे़ उसी की रसीली कमुरिया। सोबै न जागे न देखे न सपना,…

भूल की भरमार

भारी भूल में रे, भोले भूले-भूले डोलें। डाल युक्ति के बाट न जिसको, तर्क-तुला पर तोलें, अन्धों की अटकल से उसको, टेक टिकाय टटोले। पाय प्रकाश सत्य-सविता का, आँख उलूक…

कूटोक्ति

कुछ नहीं, कुछ में समाया कुछ नहीं, कुछ न कुछ का भेद पाया, कुछ नहीं। एकरस कुछ है नहीं कुछ दूसरा, कुछ नहीं बिगड़ा, बनाया कुछ नहीं। कुछ न उलझा,…

सद्सम्मेलन

पाया सद्सदुभय संयोग चतुर चातुरी से कर देखो, अमित यत्न उद्योग, इनका हुआ न है न होगा अन्तर युक्त वियोग। कोन मिटावे जड़-चेतन का, स्वाभाविक अतियोग, ठोस-पोल के अलग न…

तोते पर अन्योक्ति

तोते तुझे तेरे करतब ने इस बन्धन में डाला है रे ! सुन सीखे जो शब्द हमारे, उनको बोल रहा है प्यारे, मिट्ठू तुझे इसी कारण से, कनरसियों ने पाला है…

योगोद्धार

मिल जाने का ठीक ठिकाना अब तो जाना रे। बैठ गया विज्ञान-कोष पै, गुरु-गौरव का थाना, प्रेम-पन्थ में भेड़चाल से, पड़ा न मेल मिलाना, बदला बानारे, अब तो जानारे ।।1।।…

योग पर अन्योक्ति

आज मिला बिछुड़ा बर मेरा, पाया अचल सुहाग री ! भभका बेग वियोगानल का, स्रोत जलाया धीरज-जल का, डूबी सुरत-प्रेम-सागर में, बुझी न उर की आग री ! इत-उत थाँग लगाती डोली,…

पिय-मिलन

आज अली बिछुरो पिय पायो, मिट गये सकल कलेश री! सागर, ताल, नदी, नद-नारे, ग्राम, नगर, गिरि-कानन सारे, एक न छोड़ो ढूँढ़फिरी मैं, भटकी देश-विदेश री! मै बिरहिनि ऐसी बौरानी,…

अपूर्व चिन्तन

कौन उपाय करूँ पिय प्यारो, साथ रहै पर हाथ न आवे। चहुँ दिसि दौरी द्वन्द्व मचायो, अचल अचंचल पकड़ न पायो, खुलत न खेलत खेल खिलाड़ी, मोहि खिलौना मान खिलावे।…

विदा

साँची मान सहेली परसों, पीतम लैवे आवेगो री! मात-पिता भाई-भौजाई, सबसों राख सनेह-सगाई, दो दिन हिल-मिल काट यहाँ से-फिर को तोहि पठावेगी री! अबको छेता नाहिं टरेगो, जानों पिय के…

अन्योक्ति से उपदेश

सजले साज सजीले सजनी, मान विसार मनाले वर को। गौरव-अंगराग मलवाले, मेल-मिलाप तेल डलवाले, न्हाले शुद्ध सुशील-सलिल से, काढ़ कुमति-मैली चादर को। ओढ़ सुमति की उज्ज्वल सारी, सद्गुण-भूषण धार दुलारी,…

प्रयाण पर अन्योक्ति

है परसों रात सुहाग की, दिन वर के घर जोन का। पीहर में न रहेगी प्यारी, हा! होगी हम सब से न्यारी, चलने की करले तैयारी, बन मूरति अनुराग की-…