Category Archives: Hafiz Jounpuri

वो हसीं बाम पर नहीं आता

वो हसीं बाम पर नहीं आता चाँद अपना नज़र नहीं आता हूक उठती नहीं है कब दिल से मुँह को किस दिन जिगर नहीं आता कौन इस बे-कसी में पुरसाँ…

वस्ल में आपस की हुज्जत और है

वस्ल में आपस की हुज्जत और है इस शकर-रंजी में लज़्जत और है कुछ नहीं वादा-ख़िलाफी का गिला आप से हम को शिकायत और है सुब्ह होते ही बदल जाएगी…

सुन के मेरे इश्क़ की रूदाद को

सुन के मेरे इश्क़ की रूदाद को लोग भूले क़ैस को फ़रहाद को ऐ निगाह-ए-यास हो तेरा बुरा तू ने तड़पा ही दिया जल्लाद को बाद मेरे उठ गई कद्र-ए-सितम…

साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई

साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई दर्द को दिल से मोहब्बत हो गई क्या जवानी जल्द रूख़्सत हो गई इक छलावा थी कि चम्पत हो गई दिल की गाहक अच्छी…

पत्थर से न मारो मुझे दीवाना समझ कर

पत्थर से न मारो मुझे दीवाना समझ कर आया हूँ इधर कूचा-ए-जानाना समझ कर कहते हैं ये रोने से लगी दिल की बुझेगी समझाते हैं अपना मुझे परवाना समझ कर…

कहा ये किस ने कि वादे का ऐतबार न था

कहा ये किस ने कि वादे का ऐतबार न था वो और बात थी जिस से मुझे क़रार न था शब-ए-विसाल वो किस नाज़ से ये कहते हैं हमारे हिज्र…

जुनूँ के जोश में फिरते हैं मारे मारे अब

जुनूँ के जोश में फिरते हैं मारे मारे अब अजल लगा दे कहीं गोर के किनारे अब गया जो हाथ से वो वक़्त फिर नहीं आता कहाँ उम्मीद कि फिर…

इधर होते होते उधर होते होते

इधर होते होते उधर होते होते हुई दिल की दिल को ख़बर होते होते बढ़ी चाह दोनों तरफ़ बढ़ते बढ़ते मोहब्बत हुई इस कदर होते होते तिरा रास्ता शाम से…

दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के

दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के तो पछताए बहुत हम तौबा कर के लिपट जाओ गले से वक़्त-ए-आखिर कि फिर जीता नहीं है कोई मर के वहाँ से आ…

बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है

बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है हाए क्या चीज़ ग़रीबुल-वतनी होती है नहीं मरते हैं तो ईज़ा नहीं झेली जाती और मरते हैं तो पैमाँ-शिकनी होती है दिन…