Category Archives: Gulzar

न जाने क्या था

न जाने क्या था, जो कहना था आज मिल के तुझे तुझे मिला था मगर, जाने क्या कहा मैंने वो एक बात जो सोची थी तुझसे कह दूँगा तुझे मिला…

इन बूढ़े पहाड़ों पर

इन बूढ़े पहाड़ों पर, कुछ भी तो नहीं बदला सदियों से गिरी बर्फ़ें और उनपे बरसती हैं हर साल नई बर्फ़ें इन बूढ़े पहाड़ों पर…. घर लगते हैं क़ब्रों से…

कितनी सदियों से ढूँढ़ती होंगी

कितनी सदियों से ढूँढ़ती होंगी तुमको ये चाँदनी की आवज़ें पूर्णमासी की रात जंगल में नीले शीशम के पेड़ के नीचे बैठकर तुम कभी सुनो जानम भीगी-भीगी उदास आवाज़ें नाम…

तेरी आँखें तेरी ठहरी हुई ग़मगीन-सी आँखें

तेरी आँखें तेरी ठहरी हुई ग़मगीन-सी आँखें तेरी आँखों से ही तख़लीक़ हुई है सच्ची तेरी आँखों से ही तख़लीक़ हुई है ये हयात तेरी आँखों से ही खुलते हैं,…

मुझको इतने से काम पे रख लो

मुझको इतने से काम पे रख लो… जब भी सीने पे झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उसको मुझको इतने से काम पे रख…

देखो, आहिस्ता चलो

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं. काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,…

रात चुपचाप दबे पाँव

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता…

पूरा एक दिन

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर रोज़ मिलता है मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है, झपट लेता है, अंटी से कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने…

हम को मन की शक्ति देना

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें दूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें। भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें दोस्तों से भूल हो…