Category Archives: Gulzar

लौटूंगी मैं तेरे लिए

सहमी सहमी रातों में सहमी सहमी चलती हूँ सहमी सहमी रातों में सहमी सहमी चलती हूँ लौटूंगी मैं तेरे लिए तेरे लिए जानिया वे काली अमावस के पीछे खड़ी हूँ…

रोको मत टोको मत  सोचने दो इन्हें सोचने दो 

रोको मत टोको मत सोचने दो इन्हें सोचने दो रोको मत टोको मत होए टोको मत इन्हें सोचने दो मुश्किलों के हल खोजने दो रोको मत टोको मत निकलने तो…

काली काली आँखों का काला काला जादू है

काली काली आँखों का काला काला जादू है आधा आधा तुझ बिन मैं आधी आधी सी तू है काली काली आँखों का काला काला जादू है आज भी जुनूनी सी…

सपना रे सपना

सपना रे सपना, है कोई अपना अंखियों में आ भर जा अंखियों की डिबिया, भर दे रे निंदिया जादू से जादू कर जा सपना रे सपना, है कोई अपना अंखियों…

जय हो,

जय हो, जय हो जय हो, जय हो आजा आजा जिंद शामियाने के तले, आजा ज़रीवाले नीले आसमान के तले जय हो, जय हो जय हो, जय हो रत्ती रत्ती…

मेरा कुछ सामान

(1) जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो आंखें जब दे रही हों आवाज़ें ठंडी…

खाली कागज़

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? एक ख़ामोश-सा जवाब तो है। डाक से आया है तो कुछ कहा होगा “कोई वादा नहीं… लेकिन देखें कल वक्त क्या तहरीर करता…

रात भर सर्द हवा चलती रही 

रात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव तापा मैंने माज़ी से कई ख़ुश्क सी शाख़ें काटीं तुमने भी गुज़रे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े मैंने जेबों से…

वो जो शायर था चुप सा रहता था

वो जो शायर था चुप सा रहता था बहकी-बहकी सी बातें करता था आँखें कानों पे रख के सुनता था गूंगी ख़ामोशियों की आवाज़ें जमा करता था चाँद के साए…

देखो, आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा 

देखो, आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच सँभल कर ज़रा पाँव रखना ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं कांच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई…

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है  

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं अभी…