Category Archives: Ghalib

वुसअत-ए-सई-ए-करम देख कि सर-ता-सर-ए-ख़ाक 

वुसअत-ए-सई-ए-करम देख कि सर-ता-सर-ए-ख़ाक गुज़रे है आबला-पा अब्र-ए-गुहर-बार हुनूज़ यक-क़लम काग़ज-ए-आतिश-जदा है सफ़्हा-ए-दश्‍त नक़्श-ए-पा में है तब-ए-गर्मी-ए-रफ़्तार हुनूज़

रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इजि़्तराब है 

रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इजि़्तराब है इस साल के हिसाब को बर्क़ आफ़्ताब है मीना-ए-मय है सर्व नशात-ए-बहार से बाल-ए-तदरव जल्वा-ए-मौज-ए-शराब है ज़ख़्मी हुआ है पाश्रा पा-ए-सबात का ने भागने की गूँ न…

याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे

याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे सुब्हा-ए-ज़ाहिद हुआ है ख़्ंदा ज़ेर-ए-लब मुझे है कुशाद-ए-ख़ातिर-ए-वा-बस्ता दर रहन-ए-सुख़न था तिलिस्म-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद ख़ाना-ए-मकतब मुझे या रब इस आशुफ़्तगी की दाद किस से चाहिए…

मस्ती ब-ज़ौक़-ए-ग़फ़लत-ए-साकी हलाक है 

मस्ती ब-ज़ौक़-ए-ग़फ़लत-ए-साकी हलाक है मौज-ए-शराब यक-मिज़ा-ए-ख़्वाब-नाक है जुज़ ज़ख्म-ए-तेग-ए-नाज़ नहीं दिल में आरज़ू जेब-ए-ख़याल भी तिरे हाथों से चाक है जोश-ए-जुनूँ से कुछ नज़र आता नहीं ‘असद’ सहरा हमारी आँख…

मुमकिन नही कि भूल के भी आर्मीदा हूँ 

मुमकिन नही कि भूल के भी आर्मीदा हूँ मैं दश्‍त-ए-ग़म में आहूव-ए-सय्याद-दीदा हूँ हूँ दर्द-मंद जब्र हो या इख़्तियार हो गह नाल-ए-कशीदा गह अश्‍क-ए-चशीदा हूँ नय सुब्हा से इलाक़ा नय…

फिर हुआ वक़्त कि हो बाल-कुशा मौज-ए-शराब

फिर हुआ वक़्त कि हो बाल-कुशा मौज-ए-शराब दे बत-ए-मय को दिल-ओे-दस्त-ए-शना मौज-ए-शराब पूछ मत वजह-ए-सियह-मस्ती-ए-अरबाब-ए-चमन साया-ए-ताक में होती है हवा मौज-ए-शराब जो हुआ ग़र्का-ए-मय बख़्त-ए-रसा रखता है सर से गुज़रे…

फ़ारिग मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर 

फ़ारिग मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर है दाग़-ए-इश्‍क़ ज़ीनत-ए-जेब-कफ़न हुनूज़ है नाज़-ए-मुफ़्लिसाँ ज़र-ए-अज़-दस्त-रफ़्ता पर हूँ गुल-फ़रोश-ए-शोख़ी-ए-दाग़-ए-कोहन हुनूज़ मै-ख़ना-ए-जिगर में यहाँ ख़ाक भी नही ख़म्याज़ा खींचे है बुत-ए-दाद-फ़न हुनूज़ जूँ जादा…

नश्‍शा-हा शादाब-ए-रंग ओ साज़-हा मस्त-ए-तरब

नश्‍शा-हा शादाब-ए-रंग ओ साज़-हा मस्त-ए-तरब शीशा-ए-मय सर्व-ए-सब्ज़-जू-ए-बार-ए-नग़्मा है हम-नशीं मत कह कि बरहम कर न बज़्म-ए-ऐश-ए-दोस्त वाँ तो मेरे नाले को भी ए‘तिबार-ए-नग़्मा है

नवेद-ए-अम्र है बेदाद-ए-दोस्त जाँ के लिए 

नवेद-ए-अम्र है बेदाद-ए-दोस्त जाँ के लिए रही न तर्ज़-ए-सितम कोई आसमाँ के लिए बला से गर मिज़ा-ए-यार तिश्रा-ख़ूँ है रखूँ कुछ अपनी भी मिज़्गान-ए-ख़ूँ फ़िशाँ के लिए वो ज़िंदा हम…