Category Archives: Firaq Gorakhpuri

नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले

नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले शाम सुहानी रात सुहानी दीवाली के दीप जले धरती का रस डोल रहा है दूर-दूर तक खेतों के लहराये वो आंचल…

तेरे आने की महफ़िल ने जो कुछ आहट-सी पाई है

तेरे आने की महफ़िल ने जो कुछ आहट-सी पाई है, हर इक ने साफ़ देखा शमअ की लौ थरथराई है. तपाक और मुस्कराहट में भी आँसू थरथराते हैं, निशाते-दीद भी…

धुँधलका

१.शाम ये शाम इक आईना-ए-नीलगूं,ये नम,ये महक ये मंजरों की झलक, खेत, बैग, दरिया, गांव वो कुछ सुलगते हुए,कुछ सुलगने वाले अलाव सियाहियों का दबे पाँव आसमां से नजूल लटों…

आधी रात को

१. सियाह पेड़ हैं अब आप अपनी परछाईं जमीं से ता महो-अंजुम सुकूत के मीनार जिधर निगाह करे इक अथाह गुमशुदगी एक-एक करके अफ़सुर्दा चिरागों की पलकें झपक गई-जो खुली…

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है. खुलें आँखे तो दुनिया दर्द की तस्वीर होती है. उमीदें जाए और फिर जीता रहे कोई. न पूछ ऐ दोस्त!क्या फूटी हुई…

जो दिलो-जिगर में उतर गई वो निगाहे-यार कहाँ है अब  

जो दिलो-जिगर में उतर गई वो निगाहे-यार कहाँ है अब ? कोई हद है ज़ख्मे-निहाँ की भी कि हयात वहमो गुमाँ है अब मिली इश्क़ को वो हयाते नौ कि आदम…

देखा हर एक शाख पे गुंचो को सरनिगूँ. जब आ गई चमन पे तेरे बांकपन की बात

देखा हर एक शाख पे गुंचो को सरनिगूँ. जब आ गई चमन पे तेरे बांकपन की बात. जाँबाज़ियाँ तो जी के भी मुमकिन है दोस्ती. क्यों बार-बार करते हो दारों-दसन…

हमको तुमको फेर समय का ले आई ये हयात कहाँ 

हमको तुमको फेर समय का ले आई ये हयात कहाँ ? हम भी वही हैं तुम भी वही हो लेकिन अब वो बात कहाँ ? कितनी उठती हुई जवानी खिलने से पहले…

खो के इक शख्स को हम पूछते फिरते हैं यही

खो के इक शख्स को हम पूछते फिरते हैं यही. जिसकी तकदीर बिगड़ जाए वो करता क्या है ? निगहे-शौक़ में और दिल में ठनी है कब से. आज तक हम…

फ़रिश्तों और देवताओं का भी

फ़रिश्तों और देवताओं का भी, जहाँ से दुश्वार था गुज़रना. हयात कोसों निकल गई है, तेरी निगाहों के साए-साए. हज़ार हो इल्मी-फ़न में यकता, अगर न हो इश्क आदमी में.…

न पूछ क्या काम कर गई है, दिलो-नज़र में उतर गई है

न पूछ क्या काम कर गई है, दिलो-नज़र में उतर गई है. तेरी नज़र सब को आज़माए, तेरी नज़र कौन आज़माए. शिगुफ़्ता१ दिल को न कर सकेगा, रुका-रुका ज़ेरे-लब तबस्सुम२.…