Category Archives: Firaq Gorakhpuri

हमनवा कोई नहीं है वो चमन मुझको दिया

हमनवा कोई नहीं है वो चमन मुझको दिया हमवतन बात न समझें वो वतन मुझको दिया। ऐ जुनूँ आज उन आँखों की दिलाकर मुझे याद तू ने सौ ख़ित्ता-ए-आहू-ए-ख़ुतन मुझको दिया।…

वादे की रात मरहबा, आमदे-यार मेहरबाँ

वादे की रात मरहबा, आमदे-यार मेहरबाँ जुल्फ़े-सियाह शबफ़शाँ, आरिजे़-नाज़ महचकाँ। बर्क़े-जमाल में तेरी, ख़ुफ़्ता सुकूने-बेकराँ और मेरा दिले-तपाँ, आज भी है तपाँ-तपाँ। शाम भी थी धुआँ-धुआँ हुस्न भी था उदास-उदास याद…

नैरंगे-रोज़गार में कैफ़े-दवाम देख

नैरंगे-रोज़गार में कैफ़े-दवाम देख साक़ी की मस्त आँख से गर्दिश में जाम देख। क़ुदरत की सैर कर तेरे होशो-जुनूँ की ख़ैर ये गुलसिताने सुब्‍ह, ये सहरा-ए-शाम देख। बस इक निगाह हासिले-बज़्मे-निशात है…

ये कौल तेरा याद है साक़ी-ए-दौराँ

ये कौल तेरा याद है साक़ी-ए-दौराँ अंगूर के इक बीच में सौ मयकदे पिनहाँ। अँगड़ाइयाँ सुब्‍हों की सरे-आरिज़े-ताबाँ। वो करवटे शामों की, सरे-काकुले-पेचाँ। सद-मेह्‌र दरख़्‍शिन्दा, चराग़े-तहे-दामाँ। सरता-ब-क़दम तू शफ़क़िस्ताँ-शफ़क़िस्ताँ। पैकर…

ज़हे-आबो-गिल की ये कीमिया

ज़हे-आबो-गिल की ये कीमिया, है चमन की मोजिज़ा-ए-नुमू न ख़िज़ाँ है कुछ न बहार कुछ, वही ख़ारो-ख़स, वही रंगो-बू। मेरी शाएरी का ये आईना, करे ऐसे को तेरे रू-ब-रू जो तेरी…

ये सबाहत की ज़ौ महचकाँ – महचकाँ

ये सबाहत की ज़ौ महचकाँ – महचकाँ ये पसीने की रौ कहकशाँ – कहकशाँ। इश्क़ था एक दिन दास्ताँ-दास्ताँ आज क्यों है वही बेज़बाँ-बज़बाँ। दिल को पाया नहीं मंज़िलों-मंज़िलों हम पुकार आये हैं कारवाँ-कारवाँ।…

निगाहों में वो हल कई मसायले-हयात के

निगाहों में वो हल कई मसायले-हयात के वो गेसूओं के ख़म कई मआमिलात के । हमारी उँगलियों में धड़कने हैं साज़े – दह्र की हम अह्‌ले-राज़ पारखी हैं, नब्ज़े कायनात के।…

ज़मी बदली, फ़लक बदला,

ज़मी बदली, फ़लक बदला, मज़ाके-ज़िन्दगी बदला तमद्दुन के कदीम अक़दार बदले आदमी बदला। ख़ुदा-ओ-अह्रमन बदले वो ईमाने-दुई बदला हुदूदे-ख़ैरो-शर बदले, मज़ाके-काफ़िरी बदला। नये इंसान का जब दौरे – ख़ुदनाआगही बदला रमूज़े – बेखुदी बदले, तक़ाज़ा-ए-ख़ुदी बदला।…

हाल सुना फ़सानागो

हाल सुना फ़सानागो, लब की फ़ुसूँगरी के भी क़िस्से सुना उस आँख के जादू-ए-सामिरी के भी। काबा-ए-दिल में हैं निशाँ, कुछ फ़ने-आज़री के भी बारगहे-इलाह में, जल्वे हैं क़ाफ़िरी के भी। तुर्फ़ा तिलिस्मे-रंगो-बू,…

वो आँख ज़बान हो गई है

वो आँख ज़बान हो गई है हर बज़्म की जान हो गई है। आँखें पड़ती है मयकदों की, वो आँख जवान हो गयी है। आईना दिखा दिया ये किसने, दुनिया…

उजाड़ बन में कुछ आसार से चमन के मिले

उजाड़ बन में कुछ आसार से चमन के मिले दिले-ख़राब से वो अपकी याद बन के मिले। हर-इक मशामाम में आलम है युसुफ़िस्ताँ का परखने वाले तो कुछ बू-ए-पैरहन के मिले…

बे-ठिकाने है दिले-ग़मगीं ठिकाने की कहो

बे-ठिकाने है दिले-ग़मगीं ठिकाने की कहो शामे-हिज्राँ , दोस्तो, कुछ उसके आने की कहो। हाँ न पूछो इक गिरफ़्तारे-कफ़स  की ज़िन्दगी हमसफ़ीराने-चमन कुछ आशियाने की कहो उड़ गया है मंजिले-दुशवार से ग़म का…