Category Archives: Chanda jhaa

अस्त्र शस्त्र रोक आब मामिलाक मारि।

अस्त्र शस्त्र रोक आब मामिलाक मारि। भाइ भाइकेँ पढ़ैछ नित्य नित्य गारि॥ ठक्क लोक हक्क पाब साधु कैँ उजारि। दैव जे ललाट लेख के सकैछ टारि? चाही नहि धन, ललितवाम,…

न्यायक भवन कचहरी नाम।

न्यायक भवन कचहरी नाम। सभ अन्याय भरल तेहि ठाम॥ सत्य वचन विरले जन भाष। सभ मन धनक हरन अभिलाष॥ कपट भरल कत कोटिक कोटि॥ ककर न कर मर्यादा छोटि॥ मन…

सुमरु सुमरु मन! शंकर समय भयंकर जानि।

सुमरु सुमरु मन! शंकर समय भयंकर जानि। ककर हृदय नहि कलुषित शासन कलि नृप पानि॥ केवल शिव करुणाकर सेवयित नहि जन हानि॥ भक्ति कल्पलति जानह परम परशमनि खानि॥ कतहु विषयमे…

समय केहन भेल घोर हे शिव!

समय केहन भेल घोर हे शिव! गोधन विपति, धरम अवनति देखि कत हिय करब कठोर॥ साधु समाज राजसँ पीड़ित अति हरषित-चित चोर। अकुलिन लोकेँ धरणि परिपूरित कुलिन समादर थोड़॥ धरम…

महेश_बाणी

फिरलहुँ देश विदेश हे शिव दुख धन्धा मध नबजन व्याकुल केओ नहि रहित कलेश।। जठरानल कारण जन हलचल, देखल नाना वेष। साधु असाधु हृदय भरि पूरल, केवल लोभ प्रवेश।। अपने…

शिव-राग

शिव निन्दा जनु रटु वटु कटु लगइत अछि कान। प्राणहुँ सौं से अधिक छथि देव देव भगवान।। दरशन शास्त्र निपुण अहाँ सकल वरन परधान। किअ हिअ देलनि एहेन विधि दारूण…

राधा-विरह

राधा-विरह   भासलि नाव अगम जल सजनी पवन बहय बड़-जोर।। एकसरि नारी कुदनि फल सजनी हठ मति नन्दकिशोर।। के कह की गति होइत सजनी थर थर जिव मोर काँप।। दुर…