Category Archives: Kaka Hathrashi

सारे जहाँ से अच्छा है

सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है लेकर…

खटमल-मच्छर-युद्ध

‘काका’ वेटिंग रूम में फँसे देहरादून । नींद न आई रात भर, मच्छर चूसें खून ॥ मच्छर चूसें खून, देह घायल कर डाली । हमें उड़ा ले ज़ाने की योजना…

एअर कंडीशन नेता

वंदन कर भारत माता का, गणतंत्र राज्य की बोलो जय। काका का दर्शन प्राप्त करो, सब पाप-ताप हो जाए क्षय॥ मैं अपनी त्याग-तपस्या से जनगण को मार्ग दिखाता हूँ। है…

अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार

बिना टिकट के ट्रेन में चले पुत्र बलवीर जहाँ ‘मूड’ आया वहीं, खींच लई ज़ंजीर खींच लई ज़ंजीर, बने गुंडों के नक्कू पकड़ें टी. टी. गार्ड, उन्हें दिखलाते चक्कू गुंडागर्दी,…

भ्रष्टाचार

राशन की दुकान पर, देख भयंकर भीर ‘क्यू’ में धक्का मारकर, पहुँच गये बलवीर पहुँच गये बलवीर, ले लिया नंबर पहिला खड़े रह गये निर्बल, बूढ़े, बच्चे, महिला कहँ ‘काका’…

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ

प्रकृति बदलती क्षण-क्षण देखो, बदल रहे अणु, कण-कण देखो| तुम निष्क्रिय से पड़े हुए हो | भाग्य वाद पर अड़े हुए हो| छोड़ो मित्र ! पुरानी डफली, जीवन में परिवर्तन लाओ…

मुर्ग़ी और नेता

नेता अखरोट से बोले किसमिस लाल हुज़ूर हल कीजिये मेरा एक सवाल मेरा एक सवाल, समझ में बात न भरती मुर्ग़ी अंडे के ऊपर क्यों बैठा करती नेता ने कहा,…

तेली कौ ब्याह

भोलू तेली गाँव में, करै तेल की सेल गली-गली फेरी करै, ‘तेल लेऊ जी तेल’ ‘तेल लेऊ जी तेल’, कड़कड़ी ऐसी बोली बिजुरी तड़कै अथवा छूट रही हो गोली कहँ…

पिल्ला

पिल्ला बैठा कार में, मानुष ढोवें बोझ भेद न इसका मिल सका, बहुत लगाई खोज बहुत लगाई खोज, रोज़ साबुन से न्हाता देवी जी के हाथ, दूध से रोटी खाता…

स्त्रीलिंग, पुल्लिंग

काका से कहने लगे ठाकुर ठर्रा सिंग, दाढ़ी स्त्रीलिंग है, ब्लाउज़ है पुल्लिंग। ब्लाउज़ है पुल्लिंग, भयंकर ग़लती की है, मर्दों के सिर पर टोपी पगड़ी रख दी है। कह…

पंचभूत

भाँड़, भतीजा, भानजा, भौजाई, भूपाल पंचभूत की छूत से, बच व्यापार सम्हाल बच व्यापार सम्हाल, बड़े नाज़ुक ये नाते इनको दिया उधार, समझ ले बट्टे खाते ‘काका ‘ परम प्रबल…

मोटी पत्नी

ढाई मन से कम नहीं, तौल सके तो तौल किसी-किसी के भाग्य में, लिखी ठौस फ़ुटबौल लिखी ठौस फ़ुटबौल, न करती घर का धंधा आठ बज गये किंतु पलंग पर…