Tag Archives: zamaane

जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे

जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे हुई शाम यादों के इक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे घड़ी दो घड़ी मुझको पलकों पे रख…

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊँगा ज़माना देखेगा

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊँगा ज़माना देखेगा और मैं न देख पाऊँगा हयातो-मौत फ़िराको-विसाल सब यकजा मैं एक रात में कितने दिये जलाऊँगा पला बढ़ा हूँ अभी तक…

हुस्न का जादू जगाए इक ज़माना हो गया

हुस्न का जादू जगाए इक ज़माना हो गया. ऐ सुकूते-शामे-ग़म फिर छेड़ उन आँखों की बात. ज़िन्दगी को ज़िन्दगी करना कोई आसाँ न था. हज़्म करके ज़हर को करना पड़ा…

किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोका है सब, मगर फिर भी हजार बार ज़माना इधर से गुजरा नई नई है मगर कुछ…

कोई नयी ज़मीं हो, नया आसमाँ भी हो

कोई नयी ज़मीं हो, नया आसमाँ भी हो ए दिल अब उसके पास चले, वो जहाँ भी हो अफ़सुर्दगी- ए- इश्क़ में सोज़- ए- निहाँ भी हो यानी बुझे दिलों…

जो आए वो हिसाब-ए-आब-ओ-दाना

जो आए वो हिसाब-ए-आब-ओ-दाना करने वाले थे गए वो लोग जो कार-ए-ज़माना करने वाले थे उड़ाने के लिए कुछ कम नहीं है ख़ाक घर में भी वो मौसम ही नहीं…

इकीसवीं सदी

दुःख सुख था एक सबका अपना हो या बेगाना एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना दादा हैं आते थे जब, मिटटी का एक घर था चोरों…

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए गैर-मुमकिन है… जिस घड़ी…

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में हर…

मैं ग़ज़ल कहूँ मैं ग़ज़ल पढूँ, मुझे दे तो हुस्न-ए-ख़्याल दे 

मैं ग़ज़ल कहूँ मैं ग़ज़ल पढूँ, मुझे दे तो हुस्न-ए-ख़्याल दे तिरा ग़म ही मेरी तरबियत, मुझे दे तो रंज-ए-मलाल दे सभी चार दिन की हैं चांदनी, ये रियासतें ये…

ऐसा जगिआ ज्ञान पलीता ।

ऐसा जगिआ ज्ञान पलीता । ना हम हिन्दू ना तुर्क ज़रूरी, नाम इश्क दी है मनज़ूरी, आशक ने वर जीता, ऐसा जग्या ज्ञान पलीता । वेखो ठग्गां शोर मचाइआ, जंमना…

ये जो है हुक़्म मेरे पास न आए कोई

ये जो है हुक़्म मेरे पास न आए कोई इसलिए रूठ रहे हैं कि मनाए कोई ये न पूछो कि ग़मे-हिज्र में कैसी गुज़री दिल दिखाने का हो तो दिखाए…