Tag Archives: yaad

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं हदीसे-यार के उनवाँ निखरने लगते हैं तो हर हरीम में गेसू सँवरने लगते हैं हर…

कभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से वो

कभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से वो आज़माइश दिलो-नज़र की, वो क़ुरबतें-सी, वो फासले से कभी-कभी आरज़ू के सहरा में आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से वो सारी…

आ, के वाबस्तः हैं उस हुस्न की यादें तुझ से

  आ, के वाबस्तः हैं उस हुस्न की यादें तुझ से जिसने इस दिल को परीखानः बना रखा था जिसकी उल्फ़त में भुला रखी थी दुनिया हमने दह्र को दह्र…

याद अब ख़ुद को आ रहे हैं हम

याद अब ख़ुद को आ रहे हैं हम कुछ दिनों तक ख़ुदा रहे हैं हम आरज़ूओं के सुर्ख़ फूलों से दिल की बस्ती सजा रहे हैं हम आज तो अपनी…

आ ही जाती है मगर फिर भी मेरे दर्द की याद

आ ही जाती है मगर फिर भी मेरे दर्द की याद. गरचे है तर्के-मोहब्बत में भी आराम बहुत. और भी काम है दुनियाँ में ग़में-उल्फत को. उसकी याद अच्छी नहीं…

हमसे फ़िराक़ अकसर छुप-छुप कर पहरों-पहरों रोओ

हमसे फ़िराक़ अकसर छुप-छुप कर पहरों-पहरों रोओ हो वो भी कोई हमीं जैसा है क्या तुम उसमें देखो हो जिनको इतना याद करो हो चलते-फिरते साये थे उनको मिटे तो…

यह नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चिराग़

यह नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चिराग़ तेरे ख़्याल की खुश्बू से बस रहे हैं दिमाग़ दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूं आई की जगमगा उठें जिस तरह…

शिकस्त

अपने सीने से लगाये हुये उम्मीद की लाश मुद्दतों ज़ीस्त को नाशाद किया है मैनें तूने तो एक ही सदमे से किया था दो चार दिल को हर तरह से…

सरज़मीने-यास

जीने से दिल बेज़ार है हर सांस एक आज़ार है कितनी हज़ीं है ज़िंदगी अंदोह-गीं है ज़िंदगी वी बज़्मे-अहबाबे-वतन वी हमनवायाने-सुखन आते हैं जिस दम याद अब करते हैं दिल…

जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना

जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना । तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना ।। नीले पेड़ों की घनी छाँव में हँसता सावन, प्यासी धरती…

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो वो फ़िराक़ हो या विसाल हो,…

वफ़ा को आज़माना चाहिए था

वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था आना न आना मेरी मर्ज़ी है, तुमको तो बुलाना चाहिए था हमारी ख्वाहिश एक घर की थी, उसे सारा ज़माना…