Tag Archives: urdu shayri

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस-ए-तर्क-ए मुलाक़ात बताते भी नहीं मुंतज़िर हैं दमे रुख़सत के ये मर जाए तो जाएँ फिर ये एहसान के हम छोड़…

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें जानेवाली चीज़ का ग़म क्या करें पूरे होंगे अपने अरमां किस तरह शौक़ बेहद वक्त है कम क्या करें बक्श दें प्यार…

क्या लुत्फ़-ए-सितम यूँ उन्हें हासिल नहीं होता

क्या लुत्फ़-ए-सितम यूँ उन्हें हासिल नहीं होता ग़ुँचे को वो मलते हैं अगर दिल नहीं होता कुछ ताज़ा मज़ा शौक़ का हासिल नहीं होता हर रोज़ नई आँख, नया दिल…

न रवा कहिये न सज़ा कहिये

न रवा कहिये न सज़ा कहिये कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़ इस को हर्गिज़ न बर्मला कहिये वो मुझे क़त्ल कर के कहते…

कहाँ थे रात को हमसे ज़रा निगाह मिले

कहाँ थे रात को हमसे ज़रा निगाह मिले तलाश में हो कि झूठा कोई गवाह मिले तेरा गुरूर समाया है इस क़दर दिल में निगाह भी न मिलाऊं तो बादशाह…

उनके एक जां-निसार हम भी हैं

उनके एक जां-निसार हम भी हैं हैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन तुम भी हो बेक़रार हम भी हैं ऐ फ़लक कह तो…

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुतां की है

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुतां की है मुझ को ख़बर नहीं मेरी मिट्टी कहाँ की है कुछ ताज़गी हो लज्जत-ए-आज़ार के लिए हर दम मुझे तलाश नए आसमां की…