Tag Archives: urdu gajal

दुश्वार

हज़रते ईसा से पूछा किसी ने जो था हुशियार इस हस्ती में चीज़ कया है सबसे ज़्यादा दुश्वार बोले ईसा सबसे दुश्वार ग़ुस्सा ख़ुदा का है प्यारे कि जहन्नुम भी…

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस-ए-तर्क-ए मुलाक़ात बताते भी नहीं मुंतज़िर हैं दमे रुख़सत के ये मर जाए तो जाएँ फिर ये एहसान के हम छोड़…

मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया

मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया वो मेरा भूलने वाला जो मुझे याद आया दी मुअज्जिन ने शब-ए-वस्ल अज़ान पिछली रात हाए कम-बख्त के किस वक्त ख़ुदा याद आया…

इस अदा से वो वफ़ा करते हैं

इस अदा से वो वफ़ा करते हैं कोई जाने कि वफ़ा करते हैं हमको छोड़ोगे तो पछताओगे हँसने वालों से हँसा करते हैं ये बताता नहीं कोई मुझको दिल जो…

रस्म-ए-उल्फ़त सिखा गया कोई

रस्म-ए-उल्फ़त सिखा गया कोई दिल की दुनिया पे छा गया कोई ता कयामत किसी तरह न बुझे आग ऐसी लगा गया कोई दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूं है क्या…

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया दिल ले के मुफ़्त कहते हैं कुछ काम का नहीं उल्टी शिकायतें रही…

रू-ए- अनवर नहीं देखा जाता

रू-ए- अनवर नहीं देखा जाता देखें क्योंकर नहीं देखा जाता रश्के-दुश्मन भी गवारा लेकिन तुझको मुज़्तर नहीं देखा जाता दिल में क्या ख़ाक उसे देख सके जिसको बाहर नहीं देखा जाता तौबा के बाद…

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया सुबह को खौफे शबे तार न सोने न दिया शम्अ की तरह मुझे रात कटी सूली पर चैन से यादे कदे यार…

जलाया आप हमने, जब्त कर-कर आहे-सोजां को

जलाया आप हमने, जब्त कर-कर आहे-सोजां को जिगर को, सीना को, पहलू को, दिल को, जिस्म को, जां को हमेशा कुंजे-तन्हाई में मूनिस हम समझते है अलम को, यास को, हसरत को, बेताबी को, हुरमां…

ऐश से गुजरी कि गम के साथ, अच्छी निभ गई

ऐश से गुजरी कि गम के साथ, अच्छी निभ गई निभ गई जो उस सनम के साथ, अच्छी निभ गई दोस्ती उस दुश्मने-जां ने निबाही तो सही जो निभी जुल्मो-सितम…