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हम लोग

दिल के ऐवाँ में लिए गुमशुदा शम्मा’ओं की क़तार नूरे-ख़ुर्शीद से सहमे हुए, उकताए हुए हुस्ने-महबूब के सइयाल तसव्वुर की तरह अपनी तारीकी को भींचे हुए, लिपटाए हुए ग़ायते सूद-ओ-ज़ियाँ,…

दिल-ए-नादाँ मिरा है बे-तक़सीर ज़ब्ह करते हो उस कूँ बे-तकबीर

दिल-ए-नादाँ मिरा है बे-तक़सीर ज़ब्ह करते हो उस कूँ बे-तकबीर नक्‍श-ए-दीवार सहन-ए-गुलशन है जिस ने देखा है यार की तस्वीर आशिक़ों कूँ नहीं है रूस्वाई मुसहफ़-ए-इश्‍क़ की है ये तफ़सीर…

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है. खुलें आँखे तो दुनिया दर्द की तस्वीर होती है. उमीदें जाए और फिर जीता रहे कोई. न पूछ ऐ दोस्त!क्या फूटी हुई…

मौत इक गीत रात गाती थी

मौत इक गीत रात गाती थी ज़िन्दगी झूम झूम जाती थी कभी दीवाने रो भी पडते थे कभी तेरी भी याद आती थी किसके मातम में चांद तारों से रात…

जो बात तुझ में है, तेरी तस्वीर में नहीं

जो बात तुझ में है, तेरी तस्वीर में नहीं रंगों में तेरा अक्स ढला, तू न ढल सकी साँसों की आग, जिस्म की ख़ुशबू न ढल सकी तुझ में जो…

यकसूई

अहदे-गुमगश्ता की तस्वीर दिखाती क्यों हो? एक आवारा-ए-मंजिल को सताती क्यों हो? वो हसीं अहद जो शर्मिन्दा-ए-ईफा न हुआ उस हसीं अहद का मफहूम जलाती क्यों हो? ज़िन्दगी शोला-ए-बेबाक बना…

एक मंज़र

उफक के दरीचे से किरणों ने झांका फ़ज़ा तन गई, रास्ते मुस्कुराये सिमटने लगी नर्म कुहरे की चादर जवां शाख्सारों ने घूँघट उठाये परिंदों की आवाज़ से खेत चौंके पुरअसरार…

इसी दोराहे पर

अब न इन ऊंचे मकानों में क़दम रक्खूंगा मैंने इक बार ये पहले भी क़सम खाई थी अपनी नादार मोहब्बत की शिकस्तों के तुफ़ैल ज़िन्दगी पहले भी शरमाई थी, झुंझलाई…

क़ौमी एकता

यह तवाइफ़ कई मर्दों को पहचानती है शायद इसीलिए दुनिया को ज़्यादा जानती है -उसके कमरे में हर मज़हब के भगवान की एक-एक तस्वीर लटकी है ये तस्वीरें लीडरों की…

एक तस्वीर

सुबह की धूप खुली शाम का रूप फ़ाख़्ताओं की तरह सोच में डूबे तालाब अज़नबी शहर के आकाश धुंधलकों की किताब पाठशाला में चहकते हुए मासूम गुलाब घर के आँगन…

नज़र से गुफ़्तगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह 

नज़र से गुफ़्तगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह जो प्यास तेज़ हो तो रेत भी हैं चादरे आब दिखाई दूर से देते हैं…