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 बुनियाद कुछ तो हो

(कव्वाली) कू-ए-सितम की ख़ामुशी आबाद कुछ तो हो कुछ तो कहो सितमकशो फ़रियाद कुछ तो हो बेदादगर से शिकवा-ए-बेदाद कुछ तो हो बोलो कि शोरे-हशर की ईजाद कुछ तो हो…

दिन-ब-दिन अब लुत्फ़ तेरा हम पे कम होने लगा

दिन-ब-दिन अब लुत्फ़ तेरा हम पे कम होने लगा या तो था वैसा करम या ये सितम होने लगा सच कहो तक़सीर क्या है आशिक़-ए-मज़लूम की नीमचा तिरछी निगह का…

सितारों से उलझता जा रहा हूँ 

सितारों से उलझता जा रहा हूँ शब-ए-फ़ुरक़त बहुत घबरा रहा हूँ तेरे ग़म को भी कुछ बहला रहा हूँ जहाँ को भी समझा रहा हूँ यक़ीं ये है हक़ीक़त खुल…

समाधि के दीप से

जिन नयनों की विपुल नीलिमा में मिलता नभ का आभास, जिनका सीमित उर करता था सीमाहीनों का उपहास; जिस मानस में डूब गये कितनी करुणा कितने तूफान! लोट रहा है…

सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर

सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर दुशमन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बार सामना अबके यारों का है मौला खैर…

बुलाती है मगर जाने का नईं

बुलाती है मगर जाने का नईं ये दुनिया है इधर जाने का नईं मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर मगर हद से गुजर जाने का नईं सितारें नोच कर ले…

सन्नाटा क्या चुपके-चुपके कहता है

सन्नाटा क्या चुपके-चुपके कहता है सारी दुनिया किसका रैन-बसेरा है आसमान के दोनों कोनों के आख़िर एक सितारा तेरा है, इक मेरा है अंडा मछली छूकर जिनको पाप लगे उनका…

जुगनू कोई सितारों की महफ़िल में खो गया 

जुगनू कोई सितारों की महफ़िल में खो गया इतना न कर मलाल जो होना था हो गया परवरदिगार जानता है तू दिलों का हाल मैं जी न पाऊँगा जो उसे…

रात क्या मांगे इक सितारा

रात क्या मांगे इक सितारा लहर क्या मांगे इक किनारा धरती मांगे छाव गगन की बाती मांगे ज्योत गैन की माँ अपने मुन्ने का सहारा लाल मेरे जब भी लेती…