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आज़ाद-शेर

मेरी ख़मोशी-ए-दिल पर न जाओ कि इसमें रूह की आवाज़ भी है – हर गुल हमारी अक्ल पै हँसता रहा मगर हम फ़स्ले-गुल में रंगे-ख़िज़ाँ देखते रहे – मेरा कारवाँ…