Tag Archives: Ritikaleen

उर में णाख चोर गड़े

  उर में णाख चोर गड़े। अब कैसेहुँ निकसत निहं ऊधों, तिरछै ह्व जे अड़े। णेणा बणज बसावाँ री, म्हारा साँवरा आवाँ।।टेक।। णैणा म्हौला साँवरा राज्याँ, डरताँ पलक णा लावाँ।…

इक अरज सुनो मोरी

  इक अरज सुनो मोरी मैं किन सँग खेलूं होरी।।टेक।। तुम तो जाँय विदेसाँ छाये, हमसे रहै चितचोरी। तन आभूषण छोड़यो सब ही, तज दियो पाट पटोरी। मिलन की लग…

आसा प्रभु जाण, न दीजै हो

आसा प्रभु जाण, न दीजै हो ।।टेक।। तन मन धन करि वारणै, हिरदे धरि लीजै, हो। आव सखी मुख देखिये, नैणां रस पीजै, हो। जिह जिह विधि रीझै हरि कोई…

आवो मनमोहन जी मीठो थारो

आवो मनमोहन जी मीठो थारो बोल।।टेक।। बालपनाँ की प्रीत रमइयाजी, कदे नाहिं आयो थारो तोल। दरसण बिनान मोहि जक न परत है; चित मेरो डावाँडोल। मीराँ कहै मै भई बाबरी,…

आवाँ मन मोहणा जी जोवाँ थारी

आवाँ मन मोहणा जी जोवाँ थारी बाट।।टेक।। खाण पाण म्हारे नेक न भावाँ, नैणा खुला कपाट। थे आप बिण सुख णा म्हारो, हियड़ो घणी उचाट। मीराँ थे बिण भई बावरी,…

आव सजनियाँ बाट मैं जोऊँ

आव सजनियाँ बाट मैं जोऊँ, तेरे कारण रैण न सोऊँ।।टेक।। जक न परत मन बहुत उदासी, सुन्दर स्याम मिलौ अबिनासी। तेरे कारण सब हम त्यआगे, षान पान पै मन नहीं…

आली, सांवरे की दृष्टि मानो

  आली, सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है।।टेक।। लागत बेहाल भई, तनकी सुध बुध गई, तन मन सब व्यापो प्रेम, मानो मतवारी है॥ सखियां मिल दोय चारी, बावरी…

आली रे मेरे नैणा बाण पड़ी।।

  आली रे मेरे नैणा बाण पड़ी।।टेक।। चित्त चढ़ो मेरे माधुरी मूरत उर बिच आन अड़ी। कब की ठाढ़ी पंथ निहारूँ अपने भवन खड़ी।। कैसे प्राण पिया बिन राखूँ जीवन…

आली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको।

आली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको।।टेक।। घर घर तुलसी ठाकुर पूजा दरसण गोविन्दजी को॥ निरमल नीर बहत जमुना में, भोजन दूध दही को। रतन सिंघासन आप बिराजैं, मुगट धर्‌यो तुलसी को॥…

आतुर थई छुं सुख जोवांने

  आतुर थई छुं सुख जोवांने घेर आवो नंद लालारे॥टेक॥ गौतणां मीस करी गयाछो गोकुळ आवो मारा बालारे॥१॥ मासीरे मारीने गुणका तारी टेव तमारी ऐसी छोगळारे॥२॥ कंस मारी मातपिता उगार्या…

आण मिल्यो अनुरागी गिरधर

  आण मिल्यो अनुरागी गिरधर आण मिल्यो अनुरागी ।।टेक।। साँसों सोच अंग नहि अब तो तिस्ना दुबध्या त्यागी। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, स्याम बरण बड़ भागी। जनम जनम के साहिब…

आजु शुण्या हरी आवाँ

  आजु शुण्या हरी आवाँ री, आवाँ री मण भावां री।।टेक।। घरि णा आवां गेउ लखावां, बाण पड़्या ललचावां री। णेणा म्हारा कह्यां णा बस म्हारो, णआ म्हारे पंख उड़ावां…