Tag Archives: raat

हर रोज़ हमें मिलना हर रोज़ बिछड़ना है मैं रात की परछाईं

हर रोज़ हमें मिलना हर रोज़ बिछड़ना है मैं रात की परछाईं तू सुबह का चेहरा है आलम का ये सब नक़शा बच्चों का घरौंदा है इक ज़र्रे के कब्ज़े…

वो जो शायर था चुप सा रहता था

वो जो शायर था चुप सा रहता था बहकी-बहकी सी बातें करता था आँखें कानों पे रख के सुनता था गूंगी ख़ामोशियों की आवाज़ें जमा करता था चाँद के साए…

छ्लक के कम न हो ऐसी कोई शराब नहीं

छ्लक के कम न हो ऐसी कोई शराब नहीं निगाहे-नरगिसे-राना, तेरा जवाब नहीं ज़मीन जाग रही है कि इन्क़लाब है कल वो रात है कि कोई ज़र्रा भी महवे-ख़्वाब नहीं…

रात आधी से ज्यादा गई थी,

रात आधी से ज्यादा गई थी, सारा आलम सोता था नाम तेरा ले ले कर कोई दर्द का मारा रोता था चारागरों, ये तस्कीं कैसी, मैं भी हूं इस दुनिया…

तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुई 

तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुई हयाते-ताज़ा से लबरेज़ कायनात हुई तुम्हीं ने बायसे-ग़म बारहा किया दरयाफ़्त कहा तो रूठ गये यह भी कोई बात हुई हयात राज़े-सुकूँ…

तुम्हीं ने बायसे-ग़म बारहा किया दरयाफ़्त

तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुई हयाते-ताज़ा से लबरेज़ कायनात हुई तुम्हीं ने बायसे-ग़म बारहा किया दरयाफ़्त कहा तो रूठ गये यह भी कोई बात हुई हयात राज़े-सुकूँ…

रात भी है कुछ भीगी- भीगी

रात भी है कुछ भीगी- भीगी, चांद भी है कुछ मद्धम-मद्धम तुम आओ तो आँखें खोले, सोई हुई पायल की छम-छम किसको बताएँ, कैसे बताएँ, आज अजब है दिल का…

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ मैने जज़बात निभाए हैं उसूलों की जगह अपने अरमान पिरो लाया…

सन्देह

बहती जिस नक्षत्रलोक में निद्रा के श्वासों से बात, रजतरश्मियों के तारों पर बेसुध सी गाती है रात! अलसाती थीं लहरें पीकर मधुमिश्रित तारों की ओस, भरतीं थीं सपने गिन…

मिलन

रजतकरों की मृदुल तूलिका से ले तुहिन-बिन्दु सुकुमार, कलियों पर जब आँक रहा था करूण कथा अपनी संसार; तरल हृदय की उच्छ्वास जब भोले मेघ लुटा जाते, अन्धकार दिन की…