Tag Archives: poetry

पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है by Meer taqi meer

पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश के बाले तक…

2 line shayri by amir khusro

अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई। जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।। अंगना तो परबत भयो, देहरी भई विदेस। जा बाबुल घर आपने,…

सकल बन फूल रही सरसों by Amir khusro

सकल बन फूल रही सरसों। बन बिन फूल रही सरसों। अम्बवा फूटे, टेसू फूले, कोयल बोले डार-डार, और गोरी करत सिंगार, मलनियाँ गेंदवा ले आईं कर सों, सकल बन फूल…

आ घिर आई दई मारी घटा कारी

आ घिर आई दई मारी घटा कारी। बन बोलन लागे मोर दैया री बन बोलन लागे मोर। रिम-झिम रिम-झिम बरसन लागी छाई री चहुँ ओर। आज बन बोलन लागे मोर।…

परदेसी बालम धन अकेली

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना। बिर का दुख बहुत कठिन है प्रीतम अब आजावना। इस पार जमुना उस पार गंगा बीच चंदन का पेड़ ना। इस पेड़…

मेरा इंतज़ार करना

  हमें मिलने से कोई न रोक पायेगा  मेरे हाथ में तुम्हारे नाम की रेखा है  तुम मंज़िल हो मेरे इस सफ़र की  कितनी बार तुम्हें सपने में देखा है …

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन, चल तोरे पी ने बुलाई। by Amir khusro

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन, चल तोरे पी ने बुलाई। बहुत खेल खेली सखियन से, अन्त करी लरिकाई। न्हाय धोय के बस्तर पहिरे, सब ही सिंगार बनाई। बिदा करन को…

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए भाग लगे इस आँगन को बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया के, चरन लगायो निर्धन को। मैं तो खड़ी थी आस लगाए, मेंहदी कजरा…

मनमर्जिया

आओ फिर से मनमर्जिया करते है चलो धुप मै कही बाहर निकलते है कुछ मिटटी की बर्तन बनाते है कुछ फूलो को तोड़ के लाते है रसोई से कच्चे आम लेकर…