Tag Archives: phool

चमक रही है परों में उड़ान की ख़ुश्बू

चमक रही है परों में उड़ान की ख़ुश्बू बुला रही है बहुत आसमान की ख़ुश्बू भटक रही है पुरानी दुलाइयाँ ओढे हवेलियों में मेरे ख़ानदान की ख़ुश्बू सुनाके कोई कहानी…

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे बारिशें छत पे खुली जगहों पे होती हैं मगर ग़म वो सावन है जो…

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है…

रात इक ख़्वाब हमने देखा है 

रात इक ख़्वाब हमने देखा है फूल की पंखुड़ी को चूमा है दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है जो भी गुज़रा है उसने लूटा है हम तो कुछ देर हंस…