Tag Archives: pathar

देखा गया हूँ मैं

देखा गया हूँ मैं कभी सोचा गया हूँ मैं अपनी नज़र में आप तमाशा रहा हूँ मैं मुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दिया जब मैं नहीं रहा हूँ तो…

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ मेरी नज़र में वो…

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा । इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा । हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल…

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता 

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता कभी बरसात में शादाब बेलें सूख जाती हैं हरे पेड़ों के गिरने का…

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे बारिशें छत पे खुली जगहों पे होती हैं मगर ग़म वो सावन है जो…

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो 

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो इस कायनात में कोई मंज़र नया भी हो इतनी सियाह रात में किसको सदायें दूँ ऐसा चिराग़ दे जो कभी बोलता भी…

इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं

इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं पत्थर तो क्या, किसी सद्दे-सिकन्दर को तोड़ दूं खूने-जिगर से लाल का भी मोल दूं बहा गर आंसुओं से कीमते-गौहर को…

ये धुआं सा कहाँ से उठता है

देख तो दिल कि जाँ से उठता है ये धुआं सा कहाँ से उठता है गोर किस दिल-जले की है ये फलक शोला इक सुबह याँ से उठता है खाना-ऐ-दिल…